Islamabad Talks: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम बातचीत आखिरकार बेनतीजा खत्म हो गई. युद्धविराम के बाद शुरू हुई इस वार्ता से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान ने अमेरिका की प्रमुख शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को वापस लौटना पड़ा. उन्होंने बताया कि करीब 15 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी साझा निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सके.
“हमने अपनी रेड लाइंस साफ कर दी थीं”
जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान अपनी प्राथमिकताएं और सीमाएं पूरी तरह स्पष्ट कर दी थीं. उन्होंने बताया कि किन मुद्दों पर समझौता संभव है और किन पर नहीं—यह सब पहले ही ईरान के सामने रखा जा चुका था.
इसके बावजूद ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया. वेंस के मुताबिक, “हमने पूरी पारदर्शिता के साथ बात रखी, लेकिन अंत में ईरान ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया, इसलिए हमें बिना समझौते के वापस लौटना पड़ रहा है.”
इन 3 बड़े मुद्दों पर फंसी बातचीत
1. परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन
सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रहा. अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन को सीमित करे और यह पक्की गारंटी दे कि वह भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.
वेंस ने कहा कि अमेरिका को सिर्फ मौखिक नहीं, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता चाहिए थी कि ईरान न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही ऐसी क्षमता हासिल करेगा जिससे वह जल्दी हथियार बना सके.
2. होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग
दूसरा बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य रहा. अमेरिका चाहता था कि इस अहम समुद्री मार्ग पर शिपिंग पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहे और इसमें किसी तरह की बाधा न हो.
ईरान इस मामले में पूरी तरह सहमत नहीं हुआ, जिससे बातचीत और जटिल हो गई.
3. क्षेत्रीय सुरक्षा और हिजबुल्लाह मुद्दा
तीसरा प्रमुख मुद्दा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई से जुड़ा रहा. अमेरिका इस क्षेत्रीय समीकरण को लेकर स्पष्ट रुख चाहता था, लेकिन इस पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई.
ईरान का आरोप – “अमेरिका ने बढ़ाईं मांगें”
बातचीत टूटने के बाद ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई. सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के उस चरण तक पहुंच चुके थे, जहां एक साझा ढांचा तैयार करने के लिए दस्तावेजों का आदान-प्रदान हो रहा था.
लेकिन इसी दौरान अमेरिकी पक्ष ने अतिरिक्त मांगें रख दीं, जिससे प्रक्रिया में रुकावट आई. ईरान का कहना है कि अमेरिका की लगातार बढ़ती मांगों के कारण समझौता संभव नहीं हो पाया.
वेंस ने क्या कहा?
जब जेडी वेंस से पूछा गया कि आखिर कौन-सी शर्तें ईरान ने ठुकराईं, तो उन्होंने विस्तार में जाने से परहेज किया. हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है.
उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह स्पष्ट और भरोसेमंद आश्वासन चाहिए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा और न ही ऐसे संसाधन जुटाएगा, जिससे वह तेजी से हथियार बना सके.
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