न्यूक्लियर, होर्मुज, बैलिस्टिक मिसाइल... क्यों फेल हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, किसने क्या रखी डिमांड?

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम वार्ता आखिरकार बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद यह बातचीत शांति की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही थी, लेकिन अंत में दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके.

Why America-Iran peace talks failed in Islamabad what demands
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US-Iran Talks Fail: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम वार्ता आखिरकार बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद यह बातचीत शांति की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही थी, लेकिन अंत में दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया, जिसके चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.

वेंस का बयान: “कोई समझौता नहीं हो पाया”

जेडी वेंस ने बातचीत के बाद प्रेस से कहा कि कई घंटों की चर्चा के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला. उनके अनुसार, यह स्थिति अमेरिका के साथ-साथ ईरान के लिए भी नुकसानदेह है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी टीम पूरी तैयारी और सकारात्मक रुख के साथ आई थी, लेकिन ईरानी पक्ष ने मुख्य शर्तों पर सहमति नहीं दी.

उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत करीब 21 घंटे तक चली और इस दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. हालांकि, अंतिम सहमति नहीं बन पाई. वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता की असफलता के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है, बल्कि उसने मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई.

अमेरिकी टीम का लगातार संपर्क

वेंस ने बताया कि बातचीत के दौरान अमेरिकी नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया. इसमें रक्षा और विदेश नीति से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा होती रही. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी ओर से एक “अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव” पेश किया था, जिसमें समझौते की स्पष्ट रूपरेखा दी गई थी. अब अमेरिका इस बात का इंतजार करेगा कि ईरान इस प्रस्ताव पर आगे क्या रुख अपनाता है.

बातचीत फेल होने की बड़ी वजहें

1. होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव

इस वार्ता के टूटने की सबसे बड़ी वजहों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर विवाद रहा. ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानता है. इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई.

2. परमाणु कार्यक्रम पर असहमति

ईरान का परमाणु कार्यक्रम बातचीत का सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा. अमेरिका चाहता था कि ईरान या तो अपने संवर्धित परमाणु सामग्री को सौंप दे या उसे पूरी तरह समाप्त करे. इसके अलावा अमेरिका दीर्घकालिक गारंटी भी चाहता था कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा. लेकिन इस पर भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी.

3. बैलिस्टिक मिसाइल और सुरक्षा चिंताएं

हालांकि यह मुद्दा सीधे तौर पर मुख्य बिंदु नहीं बना, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं ने भी बातचीत को जटिल बनाया. अमेरिका इन क्षमताओं पर नियंत्रण चाहता था, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा का अहम हिस्सा मानता है.

युद्ध के फिर भड़कने की आशंका

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता के विफल होने के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ सकता है. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मुद्दे अमेरिका की प्रतिष्ठा से भी जुड़े हुए हैं, इसलिए वह इस पर पीछे हटने के मूड में नहीं है. वहीं ईरान भी अपनी संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहा.

ईरान का रुख

वार्ता विफल होने के बाद ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई. ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान अत्यधिक मांगें रखीं, जिन्हें स्वीकार करना उनके लिए संभव नहीं था. उन्होंने संकेत दिया कि शर्तें संतुलित नहीं थीं और इसलिए समझौता नहीं हो पाया.

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