तेहरान: ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सख्ती से नकारा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने उनके हस्ताक्षर के कारण 800 से अधिक बंदियों की फांसी रोक दी. ईरान की न्यायपालिका ने इसे पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक बताते हुए दावा किया कि ऐसा कोई निर्णय कभी नहीं लिया गया था.
ट्रंप का दावा और ईरान का खंडन
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि ईरान ने 800 से ज्यादा कैदियों की फांसी की सजाएं रद्द कर दीं और इसके लिए उन्होंने ईरान का धन्यवाद भी किया था. ट्रंप के मुताबिक, इस कदम से अमेरिका के सैन्य अभियानों में कमी आई है. हालांकि, ईरान के शीर्ष अभियोजक ने इसे पूरी तरह से खारिज किया. उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह दावा ‘झूठा’ और ‘भ्रामक’ है, और ना तो कोई 800 कैदी थे और ना ही न्यायपालिका ने ऐसा कोई आदेश जारी किया था.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप
अमेरिका आधारित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने न्यूज एजेंसी मिजान को बताया कि ईरान सरकार की कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत और हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं. कार्यकर्ता ने कहा, 'ईरान में मरने वालों की संख्या 5002 हो गई है, जिसमें प्रदर्शनकारी, सुरक्षाकर्मी, बच्चे और आम नागरिक शामिल हैं. उन्होंने बताया कि 26,800 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.'
ईरान के राष्ट्रपति ने ट्रंप को चेताया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर कोई भी हमला हुआ, तो उसे पूरे ईरानी राष्ट्र के खिलाफ खुला युद्ध माना जाएगा. उन्होंने देश की आर्थिक परेशानियों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की पुरानी दुश्मनी और अमानवीय प्रतिबंधों की वजह से ईरान की जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप को अपराधी कहा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि ईरान में हाल के अशांत दौर में हुई मौतों और नुकसान के लिए ट्रंप जिम्मेदार हैं.
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