आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पेडाकाकानी इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है, जहां चार साल की एक बच्ची की गुब्बारे से खेलते वक्त दम घुटने से मौत हो गई. यह घटना उस समय घटी जब बच्ची अपने घर पर गुब्बारे में हवा भर रही थी, और वह हादसे का शिकार हो गई.
खुशहाल परिवार की सबसे छोटी बेटी की मौत
पेडाकाकानी निवासी श्रीनिवास राव और वेंकटरमण एक दिहाड़ी मजदूर जोड़ी हैं, और उनके पास चार बेटियां हैं. परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद, वे अपनी बेटियों को अच्छे से पालने की कोशिश कर रहे थे. उनकी दो बड़ी बेटियां स्कूल में पढ़ाई करती थीं, जबकि तीसरी बेटी आंगनवाड़ी केंद्र जाती थी. चार साल की सबसे छोटी बेटी सिरिशा, अपनी मां के साथ घर पर रहती थी. यह एक सामान्य और प्यारा सा परिवार था, लेकिन एक छोटे से खेल ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया.
घटना बुधवार सुबह की है, जब सिरिशा ने अपनी मां से गुब्बारा लेने की जिद की. मां ने कुछ पैसे दिए और सिरिशा अपनी बहन के साथ पास की दुकान पर गुब्बारा खरीदने गई. खुशी-खुशी वह घर लौटी और खेलते समय गुब्बारे में हवा भरने लगी. अचानक, खेलते वक्त गुब्बारा उसके गले में फंस गया. बच्ची घबराकर चीखने लगी, और उसके गले में फंसा गुब्बारा उसकी सांसों को रोकने लगा.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सिरिशा की सांसें रुकने पर उसकी मां और वेंकटरमण उसे लेकर तुरंत गुंटूर सरकारी अस्पताल पहुंचे, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सिरिशा की आकस्मिक मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. चार बेटियों में सबसे छोटी और प्यारी सिरिशा का खोना परिवार के लिए बेहद दर्दनाक है. मां-पिता और अन्य परिवारजन का रो-रोकर बुरा हाल है.
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को गुब्बारे जैसे छोटे सामानों से खेलने देते वक्त माता-पिता को खास सतर्कता बरतनी चाहिए. गुब्बारे बच्चों के लिए एक मनोरंजन का साधन होते हैं, लेकिन अगर यह ठीक से इस्तेमाल न किए जाएं, तो यह खतरनाक साबित हो सकते हैं. इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए जरूरी है कि बच्चों को सुरक्षित खिलौने और गतिविधियों की अनुमति दी जाए.
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