Russian Oil: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं. इसी बीच अमेरिका ने भारत को बड़ी राहत देते हुए रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है.
इस फैसले के तहत भारत आने वाले एक महीने तक रूस से तेल की खरीद जारी रख सकता है. माना जा रहा है कि यह छूट तब तक के लिए है जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं हो जाते और वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर नहीं हो जाती.
युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर
ईरान और इजराइल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुआ सैन्य संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. इस टकराव के कारण क्षेत्र में तेल सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है. ईरान से होने वाली तेल आपूर्ति फिलहाल बाधित हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है.
President Trump’s energy agenda has resulted in oil and gas production reaching the highest levels ever recorded.
— Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) March 6, 2026
To enable oil to keep flowing into the global market, the Treasury Department is issuing a temporary 30-day waiver to allow Indian refiners to purchase Russian oil.…
दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी इस संकट से प्रभावित हो सकता था, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है. इसलिए आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है.
अमेरिका ने क्यों दी छूट
आमतौर पर अमेरिका और पश्चिमी देश रूस के तेल व्यापार पर सख्त प्रतिबंध लगाए हुए हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से इन देशों ने रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई आर्थिक प्रतिबंध लागू किए थे.
हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में वैश्विक तेल बाजार में संभावित संकट को देखते हुए अमेरिका ने भारत को अस्थायी राहत देने का फैसला किया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने विशेष लाइसेंस जारी कर भारत को अगले 30 दिनों तक रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है.
भारत के सामने था सप्लाई संकट का खतरा
ईरान से जुड़े सैन्य तनाव का सबसे बड़ा असर तेल आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है.
भारत की स्थिति भी ऐसी है कि वह अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है. ऐसे में अगर कुछ समय के लिए भी आपूर्ति रुक जाती, तो देश में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता था.
फिलहाल कुछ हफ्तों का स्टॉक
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास फिलहाल कुछ हफ्तों के लिए पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है. लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है. यही वजह है कि सरकार और तेल कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं.
रूस से बढ़ेगी तेल खरीद
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के कारण भारत ने रूस से तेल खरीद में कुछ कमी की थी. हालांकि मौजूदा हालात में ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत फिर से रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. ऐसे में रूस से तेल खरीदने का विकल्प फिलहाल सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है.