पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. युद्ध की शुरुआत के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है और कीमतें 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं.
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने लगी. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है और भारत के लिए भी बेहद अहम है, क्योंकि देश के कुल आयातित तेल का लगभग आधा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है.
हालांकि इस संकट के बीच भारत को थोड़ी राहत मिली है. अमेरिका ने भारत को सीमित समय के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद की अनुमति दी है. इस अस्थायी छूट के तहत भारत अगले 30 दिनों तक रूस से तेल खरीद सकता है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
भारत के करीब पहुंच चुके हैं कई तेल टैंकर
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार भारत के तट के आसपास बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल मौजूद है. अनुमान है कि करीब 1.5 करोड़ बैरल से अधिक तेल पहले से ही भारतीय समुद्री क्षेत्र के आसपास मौजूद है. यह तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में खड़े कई टैंकरों में लदा हुआ है.
बताया जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक जहाज फिलहाल भारतीय तटों के पास मौजूद हैं और इनमें भरा तेल अभी किसी खास बंदरगाह के लिए निर्धारित नहीं है. यदि भारतीय रिफाइनरियां चाहें तो यह तेल एक सप्ताह या उससे भी कम समय में देश के बंदरगाहों तक पहुंच सकता है. इससे संभावित कमी को जल्दी पूरा किया जा सकता है.
सिंगापुर में भी खड़े हैं रूसी तेल से भरे जहाज
रिपोर्ट के मुताबिक केवल भारत के पास मौजूद टैंकर ही नहीं, बल्कि करीब 7 मिलियन बैरल रूसी तेल सिंगापुर के आसपास खड़े आठ जहाजों में भी लदा हुआ है. ये जहाज भी जरूरत पड़ने पर एक सप्ताह के भीतर भारत पहुंच सकते हैं.
इसके अलावा भूमध्य सागर और स्वेज नहर के रास्ते भी कई टैंकर पूर्व की दिशा में बढ़ रहे हैं. अनुमान है कि इनमें से कई जहाज एक महीने से भी कम समय में भारतीय तटों तक पहुंच सकते हैं.
रूस बना भारत का प्रमुख तेल सप्लायर
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत के लिए सबसे बड़ा कच्चे तेल का सप्लायर बनकर उभरा है. हालांकि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के चलते भारत ने रूस से तेल खरीद में थोड़ी कमी की थी और पश्चिम एशिया से आयात बढ़ाया था.
लेकिन वर्तमान हालात में जब पश्चिम एशिया से सप्लाई प्रभावित हो रही है, तब ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत फिर से रूसी तेल की ओर रुख कर सकता है.
कई टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे
ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार रूसी तेल से भरे कई टैंकर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. डेटा इंटेलिजेंस फर्म Kpler के मुताबिक करीब 18 टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियां निकट भविष्य में प्रतिदिन लगभग 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल खरीद सकती हैं. इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिल सकती है.
पहले डिस्काउंट पर मिल रहा था रूसी तेल
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले रूसी कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में छूट के साथ उपलब्ध था. उस समय चीन समेत कई देशों ने बड़ी मात्रा में इसका आयात किया था.
लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अब यह छूट समाप्त हो सकती है. ऐसे में भारतीय कंपनियों को रूसी तेल पहले की तुलना में ज्यादा कीमत यानी प्रीमियम पर खरीदना पड़ सकता है.
हाल के दिनों में बढ़ी कीमतें
भारतीय रिफाइनरियों ने हाल ही में लगभग 10 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है. वहीं पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है.
हालिया आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड लगभग 84.58 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 79.98 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. पिछले हफ्तों की तुलना में कीमतों में करीब 12 डॉलर प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
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