हिंदुओं पर जुल्म की इंतेहा! बांग्लादेश में हिंदू नेता को घर से उठाया, फिर पीट-पीटकर मार डाला

उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर ज़िले के एक प्रतिष्ठित हिंदू नेता — भाबेश चंद्र रॉय, जिन्हें उनके घर से अगवा कर बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया.

Hindu leader in Bangladesh kidnapped beaten to death
यूनुस | Photo: ANI

बांग्लादेश एक बार फिर अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षित साबित हो रहा है. इस बार निशाना बने हैं उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर ज़िले के एक प्रतिष्ठित हिंदू नेता — भाबेश चंद्र रॉय, जिन्हें उनके घर से अगवा कर बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया. यह नृशंस घटना देश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की काली सच्चाई को और उजागर करती है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और 'द डेली स्टार' के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, भाबेश चंद्र रॉय बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष थे और इलाके में एक सक्रिय सामाजिक नेता के रूप में जाने जाते थे. घटना के वक्त वह अपने घर में मौजूद थे, जब उन्हें एक संदिग्ध कॉल आया. कुछ ही देर में दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार लोग पहुंचे और उन्हें जबरन उठा ले गए.

क्रूरता से उनकी पिटाई की गई

रॉय की पत्नी शांतना ने दावा किया कि फोन कॉल महज़ यह पक्का करने के लिए किया गया था कि वह घर पर हैं या नहीं. अगवा करने के बाद उन्हें नाराबारी गांव ले जाया गया, जहां क्रूरता से उनकी पिटाई की गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने हमलावरों को उन्हें घसीटते और पीटते देखा. बाद में, अपराधियों ने उन्हें एक वैन में डालकर उनके ही घर के बाहर फेंक दिया. जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक उनकी जान जा चुकी थी. पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.

भले ही यह घटना एक व्यक्ति के साथ हुई हो, लेकिन यह उन सैकड़ों घटनाओं की श्रृंखला में एक और कड़ी है, जो बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ लगातार हो रही हैं. ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि देशभर में हिंदुओं के घरों, दुकानों और पूजा स्थलों पर हमला करने की 147 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें आगजनी, तोड़फोड़, और प्रतिमाओं को तोड़ने जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं.

अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से स्थिति और खराब

सितंबर 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से स्थिति और खराब हुई है. कई इलाकों में अब भी हिंदू समुदाय भय के साये में जी रहा है. प्रमुख बंगाली अखबार 'प्रथम अलो' की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि शेख हसीना सरकार के जाने के बाद देशभर में हिंदू समुदाय के खिलाफ संगठित हमले तेज़ हुए हैं.

यह सवाल अब बार-बार उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को खो चुका है? क्या वहां की अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है? और सबसे अहम—क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन घटनाओं पर चुप्पी साधे रहेगा?

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