लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित हुआ एंटी पेपर लीक बिल, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून

लोकसभा से पारित होने के बाद अब एंटी पेपर लीक बिल को राज्यसभा की भी मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उच्च सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

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नई दिल्ली: लोकसभा से पारित होने के बाद अब एंटी पेपर लीक बिल को राज्यसभा की भी मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उच्च सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. अब यह विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलते ही देश में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी संगठित अपराधों के खिलाफ नया कानून लागू हो जाएगा. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी की है. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों, गिरोहों और संस्थाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है.

कानून के दायरे में होंगे सभी गंभीर अपराध  

नए विधेयक में सजा और जुर्माने के प्रावधान पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर किए गए हैं. इसके तहत पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, ऑनलाइन प्रश्नपत्र प्रसारित करना, साइबर फ्रॉड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकल कराने जैसी गतिविधियों को गंभीर अपराध माना जाएगा. ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की कैद के साथ 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. 

वहीं यदि अपराध किसी संगठित गिरोह या संस्था द्वारा किया गया है तो कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. सरकार का मानना है कि इस सख्त कानून के लागू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा और पेपर लीक के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.

बिल पेश करते हुए क्या बोले जितेंद्र सिंह?

राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बार-बार व्यवधानों के बावजूद लगभग 10 घंटे की चर्चा के बाद इसे लोकसभा में पारित किया जा चुका है. उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं, यह विधेयक निचले सदन में पारित हो चुका है. वहां इसपर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया था. बार-बार व्यवधानों के बावजूद इसपर चर्चा हुई और बिल पास हो गया. अब यह विधेयक ऊपरी सदन में आया है’.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की प्रतिक्रिया से साफ है कि वह 2024 के कानून और मौजूदा संशोधन की जरूरत को स्वीकार कर रहा है. उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार लगातार सुधार कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि NTA जैसी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का विचार पहली बार 1992 में सामने आया था और बाद की कई समितियों ने भी इसकी सिफारिश की, लेकिन इसे लागू करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष भी इस पहल की सराहना करेगा.

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