क्या है जाली पासपोर्ट मामला, जिसमें गैंगस्टर छोटा राजन को हुई 7 साल की सजा?

गैंगस्टर छोटा राजन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सात साल की सजा सुनाई है.

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करीब दो दशक से अधिक समय तक अदालत में चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार सीबीआई को बड़ी सफलता मिली है. गैंगस्टर छोटा राजन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सात साल की सजा सुनाई है. अदालत ने सजा के साथ उस पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले का अंत नहीं, बल्कि उन मामलों में भी अहम माना जा रहा है जिनमें फर्जी पहचान बनाकर सरकारी व्यवस्था को धोखा देने की कोशिश की जाती है.

सीबीआई की जांच में सामने आया कि छोटा राजन ने खुद को 'विजय कदम' बताकर भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था. इसके लिए उसने स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट और राशन कार्ड जैसे जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, जिसके आधार पर चेन्नई पासपोर्ट कार्यालय से पासपोर्ट जारी करा लिया गया. एजेंसी ने 19 मार्च 2002 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और करीब दो साल की जांच के बाद 22 जनवरी 2004 को चार्जशीट दाखिल कर दी. जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि विजय कदम नाम के पीछे असल पहचान मुंबई के कुख्यात गैंगस्टर राजेंद्र उर्फ नाना उर्फ छोटा राजन की थी.

तिहाड़ जेल में उम्रकैद काट रहा है गैंगस्टर

सीबीआई के मुताबिक, छोटा राजन फिलहाल नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है, जहां वह हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े कई मामलों में पहले से उम्रकैद की सजा काट रहा है. फर्जी पासपोर्ट का यह मामला उसके खिलाफ दर्ज अनेक गंभीर मामलों में से एक था, लेकिन अदालत ने दस्तावेजी साक्ष्यों और जांच के आधार पर उसे इस अपराध का भी दोषी माना. इस फैसले को जांच एजेंसी की लंबी और लगातार चली कानूनी कार्रवाई का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है.

बाली एयरपोर्ट पर खुला था असली राज

25 अक्टूबर 2015 को इंडोनेशिया के बाली एयरपोर्ट पर छोटा राजन की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दिया था. वह ऑस्ट्रेलिया जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में था और उसके पास मौजूद पासपोर्ट पर 'मोहन कुमार' नाम दर्ज था. हालांकि पूछताछ के दौरान उसने अपना असली नाम राजेंद्र निकालजे बताया. ऑस्ट्रेलियाई पुलिस से मिली खुफिया सूचना के बाद इंडोनेशियाई अधिकारियों ने उसके फिंगरप्रिंट की जांच कराई, जिससे पुष्टि हुई कि वही भारत का वांछित गैंगस्टर छोटा राजन है, जिसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. इसके बाद उसे भारत लाया गया और तब से वह विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है.

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