China Iran Houthi Rebel: पश्चिम एशिया में जंग का असर अब और बढ़ता दिख रहा है. यमन के हूती विद्रोही और सऊदी अरब आमने-सामने हैं. इस बीच चीन भी कूटनीतिक तौर पर सक्रिय हो गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन ईरानी सूत्रों ने बताया कि सऊदी अरब की अपील के बाद चीन ने निजी तौर पर ईरान से कहा है कि वह हूती विद्रोहियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे. मकसद यह है कि हूती लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में तनाव को और न बढ़ाएं.
चीन ने सार्वजनिक तौर पर सभी पक्षों से संयम और बातचीत की अपील की है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, ईरान को दिए गए निजी संदेश में बीजिंग ने हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को कहा है. चीन के लिए लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे समुद्री रास्ते अहम हैं, क्योंकि यहां बढ़ता तनाव उसकी ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है.
सऊदी ने चीन से मांगी मदद
पिछले कुछ दिनों में हूतियों ने लाल सागर के तट और बाब-अल-मंदेब के आसपास तेजी से अपनी स्थिति मजबूत की है. इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात और समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. रॉयटर्स के मुताबिक, इसी वजह से रियाद ने चीन से मदद मांगी.
चीन के लिए भी यह संकट अहम है. वह ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और उसके तेल का बड़ा खरीदार है. 2025 में ईरान के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल निर्यात का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा चीन ने खरीदा था. ऐसे में बीजिंग चाहता है कि ऊर्जा की आवाजाही से जुड़े अहम समुद्री रास्ते खुले रहें.
इस बीच सऊदी अरब ने अमेरिका से भी सैन्य मदद मांगी थी. रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सैन्य सहायता की मांग की थी, लेकिन अमेरिका ने सीधे हमले के बजाय खुफिया जानकारी और लक्ष्य से जुड़ी मदद की पेशकश की.
चीन की अपील पर क्या बोला ईरान?
तीन ईरानी सूत्रों के मुताबिक, चीन की अपील पर ईरान ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता तभी आ सकती है, जब अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो. यानी बीजिंग ने हूतियों पर प्रभाव इस्तेमाल करने की बात कही, जबकि तेहरान ने क्षेत्रीय तनाव की वजह को अमेरिका-इजरायल के साथ अपने संघर्ष से जोड़ा.
चीन ने ईरान पर किसी आर्थिक कार्रवाई की धमकी नहीं दी है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह तनाव को यमन और लाल सागर तक फैलते नहीं देखना चाहता. बीजिंग ने सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करने तथा बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है.
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया के दो बड़े समुद्री रास्ते एक साथ दबाव में हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से तनाव है, जबकि हूती गतिविधियों के कारण लाल सागर और बाब-अल-मंदेब की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है. रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों रास्तों पर लंबे समय तक परेशानी रहने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
ईरान से भी रिश्ता, खाड़ी देशों से भी बड़ा कारोबार
चीन के सामने चुनौती यह है कि उसके ईरान के साथ भी मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं और खाड़ी देशों के साथ भी बड़ा कारोबार है. ईरान चीन के लिए तेल का बड़ा स्रोत है, जबकि खाड़ी क्षेत्र चीन की ऊर्जा जरूरतों और व्यापार के लिए बेहद अहम है. इसलिए बीजिंग को इस संकट में दोनों पक्षों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन बनाए रखना होगा.
2023 में सऊदी-ईरान को साथ ला चुका है चीन
चीन पहले भी सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव कम कराने में भूमिका निभा चुका है. 2023 में बीजिंग की मध्यस्थता से दोनों देशों ने रिश्ते बहाल करने पर सहमति जताई थी. अब लाल सागर और यमन के संकट में चीन के सामने एक नई चुनौती है. सवाल यह है कि क्या बीजिंग सिर्फ ईरान से हूतियों को रोकने की अपील तक सीमित रहेगा या आगे अपने कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव का भी इस्तेमाल करेगा.
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