2060 तक सूख जाएंगे दुनिया के बड़े बांध? रिपोर्ट ने दी 2 अरब लोगों पर जल संकट की चेतावनी

पानी को लेकर भविष्य में पैदा होने वाले संकट की तस्वीर अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट होती जा रही है. वैज्ञानिकों की एक नई वैश्विक रिसर्च ने संकेत दिया है कि दुनिया भर के जलाशय तेजी से अपनी क्षमता खो रहे हैं.

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नई दिल्ली: पानी को लेकर भविष्य में पैदा होने वाले संकट की तस्वीर अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट होती जा रही है. वैज्ञानिकों की एक नई वैश्विक रिसर्च ने संकेत दिया है कि दुनिया भर के जलाशय तेजी से अपनी क्षमता खो रहे हैं. इसका कारण पानी की कमी नहीं, बल्कि उनमें लगातार जमा हो रही मिट्टी और गाद है. यह समस्या इतनी गंभीर होती जा रही है कि आने वाले दशकों में अरबों लोगों के सामने पीने के पानी, सिंचाई और खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2060 तक दुनिया के अनेक जलाशय अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम नहीं रहेंगे.

पहली बार तैयार हुआ छोटे जलाशयों का वैश्विक डेटाबेस

इस महत्वपूर्ण अध्ययन का नेतृत्व चीनी वैज्ञानिकों ने किया है. शोध के दौरान विशेषज्ञों ने रिमोट सेंसिंग तकनीक, जियोस्पेशियल डेटा और इंजीनियरिंग रिकॉर्ड्स का उपयोग करके ‘ग्लोबल रिजर्वायर इन्वेंट्री’ (GREI) तैयार की. इस डेटाबेस में दुनिया भर के 5.5 लाख से अधिक जलाशयों को शामिल किया गया है.

शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें छोटे जलाशयों को भी विस्तार से शामिल किया गया. इससे पहले किए गए कई अध्ययनों में इन जलाशयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था. आंकड़ों के अनुसार, अध्ययन में शामिल 95 प्रतिशत से अधिक जलाशय एक वर्ग किलोमीटर से भी छोटे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति और कृषि के लिए इनकी भूमिका बेहद अहम है.

हर दशक में घट रही है जल संग्रहण क्षमता

रिसर्च में सामने आया है कि जलाशयों की पानी संग्रह करने की क्षमता औसतन हर दस साल में 7.3 प्रतिशत तक कम हो रही है. इसका मुख्य कारण सेडिमेंटेशन यानी मिट्टी और गाद का लगातार जमा होना है.

जब नदियों के साथ बहकर आने वाली मिट्टी बांधों और जलाशयों में जमा होने लगती है, तो धीरे-धीरे पानी के लिए उपलब्ध स्थान कम होने लगता है. समय के साथ यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि जलाशय अपनी मूल क्षमता का बड़ा हिस्सा खो दें. वैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे जलाशयों में यह प्रक्रिया बड़े बांधों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हो रही है.

सूखे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ा खतरा

अध्ययन के अनुसार, दुनिया के कई सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है. अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, मध्य पूर्व और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में जलाशयों में गाद जमा होने की रफ्तार चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है.

इन इलाकों में पहले से ही पानी की उपलब्धता सीमित है. ऐसे में जलाशयों की क्षमता कम होने से भविष्य में जल संकट और अधिक गहरा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है.

क्यों जरूरी हैं जलाशय?

जलाशय आधुनिक जल प्रबंधन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं. ये केवल पानी संग्रह करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन जैसी कई महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करते हैं.

जब इनकी क्षमता कम होने लगती है, तो इसका असर केवल जल भंडारण तक सीमित नहीं रहता. इससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, ऊर्जा उत्पादन में कमी आ सकती है और शहरों व गांवों में पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है.

दुनिया भर में पहचाने गए 16 बड़े हॉटस्पॉट

शोधकर्ताओं ने ऐसे 16 वैश्विक हॉटस्पॉट्स की पहचान की है जहां जलाशयों में गाद जमा होने की समस्या सबसे अधिक गंभीर है. इनमें अधिकांश क्षेत्र ऐसे हैं जहां बड़े पैमाने पर सिंचाई आधारित खेती की जाती है या जहां पहले से जल संकट मौजूद है.

अध्ययन के अनुसार, दुनिया की लगभग एक-चौथाई सिंचित कृषि भूमि इस खतरे से प्रभावित हो सकती है. इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य उत्पादन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

2 अरब से ज्यादा लोगों पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का अनुमान है कि जलाशयों की घटती क्षमता का प्रभाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 2 अरब से अधिक लोगों पर पड़ सकता है. यदि जलाशय पर्याप्त मात्रा में पानी संग्रह नहीं कर पाए, तो पीने के पानी की उपलब्धता कम होगी और खेती के लिए आवश्यक सिंचाई भी प्रभावित होगी.

ऐसी स्थिति में कई क्षेत्रों में खाद्य संकट, जल संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन सकती है.

2060 तक आधे जलाशय हो सकते हैं गंभीर रूप से प्रभावित

रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि यदि सेडिमेंटेशन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वर्ष 2060 तक दुनिया के आधे से अधिक जलाशयों की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है.

शोधकर्ताओं ने जलाशयों के सतत प्रबंधन, नियमित सफाई, मिट्टी नियंत्रण उपायों और बेहतर जल संरक्षण रणनीतियों को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है. उनका मानना है कि भविष्य की जल और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभी से ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है.

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