Indus Water Treaty: सिंधु नदी प्रणाली से जुड़ी भारत की दो अहम परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान ने गंभीर चिंता जताई है. भारत द्वारा चिनाब नदी बेसिन और जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजनाओं में नए विकास कार्य शुरू किए जाने के बाद इस्लामाबाद ने दावा किया है कि इन कदमों का असर उसकी अर्थव्यवस्था और जल संसाधनों पर पड़ सकता है.
हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार भारत ने चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना और जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना में एक नई सेडिमेंट बायपास सुरंग के निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ाया है. इन दोनों योजनाओं की अनुमानित लागत करीब 2,600 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना पर आपत्ति
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक के माध्यम से चिनाब नदी के जल का एक हिस्सा ब्यास बेसिन की ओर मोड़ा जा सकता है. पाकिस्तान का दावा है कि इससे उसके जल हित प्रभावित हो सकते हैं.
इस्लामाबाद ने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने परियोजना के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. पाकिस्तान का कहना है कि ऐसी परियोजनाएं सिंधु जल व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को और जटिल बना सकती हैं.
सिंधु जल संधि पर पहले से जारी है तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को प्रभावी रूप से स्थगित रखने का फैसला किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने पश्चिमी नदियों के जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में कई योजनाओं को गति दी.
सरकार का कहना है कि देश के हिस्से के जल का पूर्ण उपयोग करना उसका अधिकार है और इसी उद्देश्य से नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है.
2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
सरकारी योजना के अनुसार चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना पर 1 अगस्त से कार्य शुरू करने की तैयारी है और इसे जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. करीब 2,300 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य चिनाब नदी के अतिरिक्त जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है.
एनएचपीसी से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की लाहौल घाटी में प्रस्तावित है. योजना के तहत चिनाब नदी पर एक बैराज का निर्माण किया जाएगा और जल प्रवाह को दूसरी दिशा में ले जाने के लिए लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी. भविष्य में इस परियोजना को जलविद्युत उत्पादन से भी जोड़ा जा सकता है.
सलाल परियोजना में तकनीकी सुधार
भारत ने चिनाब नदी से संबंधित दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना के तहत जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल जलविद्युत संयंत्र में नई डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बायपास टनल के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की है. इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 268 करोड़ रुपये है.
विशेषज्ञों के अनुसार चिनाब नदी के साथ बड़ी मात्रा में गाद और तलछट बहकर आती है, जिससे जलाशयों की क्षमता प्रभावित होती है. नई सुरंग का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना है ताकि जलाशय की क्षमता, टर्बाइनों की कार्यक्षमता और बाढ़ प्रबंधन बेहतर तरीके से संचालित हो सके.
रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि ये परियोजनाएं केवल तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जल प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं. वहीं पाकिस्तान की ओर से लगातार उठाई जा रही आपत्तियां यह दर्शाती हैं कि भारत की बढ़ती जल परियोजनाओं को लेकर वहां चिंता का माहौल है.
आने वाले वर्षों में चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी ये योजनाएं भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय जल कूटनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकती हैं. भारत फिलहाल अपने जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के संकेत दे चुका है, जबकि पाकिस्तान इन पर लगातार नजर बनाए हुए है.
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