अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा होते ही कच्चे तेल के दाम हुए कम, क्रूड ऑयल की कीमत करीब 20% घटी

Crude Oil Price: वैश्विक बाजार में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा होते ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई.

ceasefire between America and Iran was announced prices of crude oil decreased by about 20%
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Crude Oil Price: वैश्विक बाजार में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा होते ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई. कुछ ही घंटों के अंदर क्रूड ऑयल की कीमत करीब 20% तक टूट गई. जो तेल पहले लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह तेजी से गिरकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट COVID-19 के बाद तेल बाजार की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट में से एक है. पिछले करीब 40 दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था, जिसकी वजह से तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही थीं. बाजार में डर था कि कहीं सप्लाई रुक न जाए, इसलिए कीमतों में “रिस्क प्रीमियम” जुड़ गया था. लेकिन जैसे ही सीजफायर की खबर आई, यह डर खत्म हुआ और कीमतें तेजी से नीचे आ गईं.

संकट की जड़: होर्मुज जलडमरूमध्य

इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका होर्मुज जलडमरूमध्य की रही. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. पूरी दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है.

जब ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की चेतावनी दी थी, तब वैश्विक बाजार में घबराहट फैल गई थी. अगर यह मार्ग बंद हो जाता, तो कई देशों को तेल की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता था. इसी डर के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं. लेकिन अब जब सीजफायर की घोषणा हुई है और इस रास्ते को फिर से खोलने की उम्मीद बढ़ी है, तो बाजार ने राहत की सांस ली है.

ट्रंप ने किया सीजफायर का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए सीजफायर की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है और अब आगे बातचीत का रास्ता खुल गया है.

ट्रंप के मुताबिक, ईरान की तरफ से 10 सूत्रों वाला एक प्रस्ताव भी सामने आया है, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी. खबर है कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है.

वहीं दूसरी ओर, ईरान ने साफ कहा है कि यह सीजफायर पूरी तरह से युद्ध का अंत नहीं है. उनका कहना है कि उन्होंने भी अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और अब आगे की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी.

ईरान ने बातचीत के दौरान कुछ बड़ी मांगें भी रखी हैं, जैसे... 

  • अमेरिका अपनी सेना हटाए
  • ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध खत्म किए जाएं
  • युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए

निवेशकों और बाजार पर असर

तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का असर सिर्फ ऊर्जा सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ेगा. जहां एक तरफ भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को इससे राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ तेल कंपनियों और निवेशकों के लिए यह नुकसान की खबर हो सकती है. तेल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

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