Foreign Trip Expense: भारतीयों की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च मार्च 2026 में काफी कम हो गया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च फरवरी के 1.3 बिलियन डॉलर से घटकर मार्च में 1.09 बिलियन डॉलर रह गया. यानी सिर्फ एक महीने में करीब 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इससे पहले जनवरी 2026 में यह खर्च 1.65 बिलियन डॉलर था.
यह आंकड़े RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश भेजे गए पैसों पर आधारित हैं. इस योजना के तहत भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकते हैं. इसमें ट्रैवल, एजुकेशन, निवेश, रिश्तेदारों का खर्च और विदेश में प्रॉपर्टी खरीद जैसी कैटेगरी शामिल होती हैं.
क्यों घटा विदेश यात्रा पर खर्च?
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये की कमजोरी ने विदेश यात्राओं को महंगा बना दिया है. यही वजह है कि लोगों ने विदेश यात्रा पर खर्च कम करना शुरू किया है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विदेशी मुद्रा बचाने के लिए विदेश यात्राएं सीमित करने और कारपूलिंग जैसे उपाय अपनाने की अपील की थी.
ट्रैवल कैटेगरी में सबसे ज्यादा खर्च
मार्च 2026 में कुल आउटवर्ड रेमिटेंस 2.59 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा ट्रैवल कैटेगरी का था. ट्रैवल खर्च को बिजनेस ट्रैवल, तीर्थयात्रा, मेडिकल ट्रीटमेंट, एजुकेशन ट्रैवल और अन्य यात्राओं में बांटा गया है.
इनमें ‘अन्य यात्रा’ कैटेगरी में सबसे ज्यादा 623.05 मिलियन डॉलर खर्च हुए. इसमें छुट्टियों के लिए विदेश यात्राएं और इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड से किए गए भुगतान शामिल हैं.
एजुकेशन ट्रैवल पर भी बड़ा खर्च
मार्च महीने में भारतीयों ने एजुकेशन से जुड़े ट्रैवल पर 450.16 मिलियन डॉलर खर्च किए. वहीं बिजनेस ट्रैवल, मेडिकल ट्रीटमेंट और तीर्थयात्रा जैसी कैटेगरी पर कुल 21.39 मिलियन डॉलर खर्च हुए.
विदेशी निवेश बढ़ा, प्रॉपर्टी खरीद घटी
दिलचस्प बात यह रही कि विदेश यात्रा पर खर्च घटने के बावजूद विदेशी निवेश में बढ़ोतरी देखने को मिली. मार्च 2026 में भारतीयों ने इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में 440.22 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जो फरवरी की तुलना में ज्यादा है.
दूसरी तरफ विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने पर खर्च घटकर 38.68 मिलियन डॉलर रह गया.
पूरे साल में कितना पैसा गया विदेश?
RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में LRS के तहत कुल 29.56 बिलियन डॉलर विदेश भेजे गए. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा ट्रैवल कैटेगरी का रहा. इससे साफ है कि विदेश यात्रा अब भी भारतीयों के खर्च का बड़ा हिस्सा बनी हुई है, लेकिन मौजूदा आर्थिक हालात के कारण इसमें सुस्ती देखने को मिल रही है.
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