Iran US Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान पर होने वाले हमलों को फिलहाल रोकने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अगले दो हफ्तों तक किसी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और इसे एक अहम कदम माना जा रहा है.
ट्रंप ने बताया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया. उनके मुताबिक, पाकिस्तान की तरफ से हमले रोकने की अपील की गई थी, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया.
Statement on behalf of the Supreme National Security Council of the Islamic Republic of Iran: pic.twitter.com/cEtBNCLnWT
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 7, 2026
क्या रखी गई शर्त?
ट्रंप ने साफ किया कि यह फैसला कुछ शर्तों के साथ लिया गया है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने के लिए तैयार हो जाता है, तो यह युद्धविराम दोनों पक्षों के बीच लागू होगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का कारोबार होता है. इसलिए इसका खुला रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी माना जाता है.
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को पहले ही हासिल कर चुका है और अब आगे बढ़कर स्थायी शांति की दिशा में काम करना चाहता है.
उनका कहना है कि यह सिर्फ अस्थायी रोक नहीं, बल्कि एक बड़े समझौते की तरफ बढ़ने का मौका हो सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट में लंबे समय के लिए शांति स्थापित की जा सके.
दोतरफा युद्धविराम की बात
ट्रंप ने इसे दोतरफा युद्धविराम बताया. यानी अगर ईरान भी शर्तों का पालन करता है, तो दोनों देशों के बीच फिलहाल शांति बनी रह सकती है. इस ऐलान के बाद ईरान की सरकारी मीडिया ने भी इस कदम की पुष्टि की है, जिससे उम्मीद जगी है कि तनाव कुछ कम हो सकता है.
क्यों है यह फैसला अहम?
पिछले कुछ समय से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया था और हालात युद्ध जैसे बनते जा रहे थे. ऐसे में हमलों को रोकने का यह फैसला बहुत अहम माना जा रहा है. अगर आने वाले दो हफ्तों में बातचीत आगे बढ़ती है, तो यह बड़े समझौते का रास्ता खोल सकता है. वहीं, अगर हालात बिगड़ते हैं, तो तनाव फिर बढ़ सकता है.
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