दिल्ली को मिली 300 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात, अमित शाह ने दिखाई हरी झंडी; आधुनिक सुविधाओं से हैं लैस

दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में मंगलवार का दिन अहम साबित हुआ. राजधानी को एक ओर 300 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिली, वहीं दूसरी ओर नरेला में अत्याधुनिक हाई सिक्योरिटी जेल की आधारशिला भी रखी गई.

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दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में मंगलवार का दिन अहम साबित हुआ. राजधानी को एक ओर 300 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिली, वहीं दूसरी ओर नरेला में अत्याधुनिक हाई सिक्योरिटी जेल की आधारशिला भी रखी गई. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इन दोनों परियोजनाओं की शुरुआत करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर राजधानी के बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है.

DTC बेड़े में शामिल हुईं 300 नई इलेक्ट्रिक बसें

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में शामिल 300 नई जीरो एमिशन इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई. इनमें 195 नौ मीटर लंबी ‘देवी’ श्रेणी की इलेक्ट्रिक बसें और 105 बारह मीटर लंबी आधुनिक इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं. इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू तथा दिल्ली सरकार के कई मंत्री भी मौजूद रहे.

यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक और सुरक्षित सुविधाएं

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नई इलेक्ट्रिक बसें लो-फ्लोर और वातानुकूलित हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों को सफर में अधिक सुविधा मिलेगी. प्रत्येक बस में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और अन्य स्मार्ट सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

इन बसों में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन होने के कारण वायु प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी. सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और यात्रियों को अधिक शांत, आरामदायक एवं पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का अनुभव मिलेगा.

तीन नए इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन

इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए नरेला सेक्टर A-1 और A-4, रिठाला तथा कोहाट एन्क्लेव में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस डिपो भी शुरू किए गए हैं. नरेला स्थित दोनों डिपो में कुल 250 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता विकसित की गई है. यहां आधुनिक पार्किंग बे, रखरखाव केंद्र और परिचालन से जुड़ी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

कोहाट एन्क्लेव डिपो में 30 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग के साथ सर्विस पिट, रिपेयर शॉप, वॉशिंग पिट, स्टोर, सुरक्षा कक्ष और विद्युत उपकेंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं. वहीं रिठाला डिपो में 90 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था की गई है, जिससे राजधानी में इलेक्ट्रिक परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा.

नंद नगरी में शुरू हुआ ऑटोमेटेड वाहन परीक्षण केंद्र

कार्यक्रम के दौरान नंद नगरी डीटीसी डिपो में चार लेन वाले अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का भी उद्घाटन किया गया. इस केंद्र पर भारी, हल्के और दोपहिया वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह स्वचालित प्रणाली के जरिए की जाएगी.

इस केंद्र में हर वर्ष लगभग 52 हजार भारी एवं हल्के वाहनों तथा 20 हजार दोपहिया वाहनों की जांच की जा सकेगी. ब्रेक, सस्पेंशन, हेडलाइट अलाइनमेंट, उत्सर्जन स्तर और अंडरबॉडी निरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं बिना मानवीय हस्तक्षेप के आधुनिक तकनीक से पूरी होंगी, जिससे पारदर्शिता और सड़क सुरक्षा दोनों में सुधार होगा.

नरेला में बनेगी अत्याधुनिक हाई सिक्योरिटी जेल

राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से अमित शाह ने नरेला में बनने वाली हाई सिक्योरिटी जेल का ई-शिलान्यास भी किया. यह परियोजना देश की सबसे आधुनिक और तकनीक आधारित उच्च सुरक्षा जेलों में शामिल होगी. इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये का वित्तपोषण गृह मंत्रालय करेगा, जबकि शेष राशि दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी.

इस जेल परिसर में 250 से अधिक कैदियों को रखने की क्षमता होगी. इसका रेडियल-एक्सियल डिजाइन इस तरह तैयार किया जाएगा कि एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से पूरे परिसर की निगरानी की जा सके. प्रत्येक कैदी के लिए अलग सेल की व्यवस्था होगी, जिससे सुरक्षा जोखिम और आपसी संपर्क की संभावनाएं कम होंगी.

AI तकनीक से होगी हर गतिविधि पर नजर

दिल्ली सरकार के अनुसार, नई हाई सिक्योरिटी जेल को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा. यहां AI आधारित सीसीटीवी निगरानी, बॉडी-वॉर्न कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल, ऑटोमेटेड लॉकिंग सिस्टम, फुल बॉडी स्कैनर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर, मोबाइल सिग्नल जैमर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

इसके अलावा परिसर में इन-हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स, एंटी-टनलिंग तकनीक और अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी बनाया जाएगा. प्रत्येक सेल में अलग शौचालय और स्नानघर की सुविधा होगी, जिससे कैदियों की अनावश्यक आवाजाही को सीमित किया जा सकेगा. सरकार का दावा है कि यह परियोजना देश में तकनीक आधारित जेल प्रबंधन का नया मानक स्थापित करेगी.

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