Wayanad Landslide: केरल का वायनाड जिला एक बार फिर प्राकृतिक आपदा और निर्माण संबंधी लापरवाही के कारण चर्चा में है. मंगलवार को यहां सुरंग सड़क परियोजना के निर्माण स्थल पर अचानक मिट्टी का विशाल ढेर धंस गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई. हादसे में 2 लोगों की जान चली गई, जबकि सात लोगों के लापता होने की खबर है. कई अन्य लोग घायल हुए हैं और राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं. भारी बारिश के बीच चल रहा यह अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
सुरंग परियोजना के पास धंसी खुदाई की मिट्टी
यह हादसा वायनाड के कल्लाडी इलाके में मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ, जहां कोझिकोड और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग सड़क परियोजना पर काम चल रहा है. जानकारी के मुताबिक, निर्माण कार्य के दौरान निकाली गई बड़ी मात्रा में मिट्टी को पास ही जमा कर दिया गया था. लगातार हो रही बारिश के कारण यह ढेर अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा. मिट्टी के साथ कई पेड़ भी उखड़ गए और निर्माण स्थल पर लगाए गए लोहे व कपड़े के बैरिकेड बह गए.
केरलम के वायनाड में हुए लैंडस्लाइड का CCTV वीडियो
— अभिषेक 'अजनबी' ✍🏻 (@abhishekAZNABI) July 7, 2026
यह लैंडस्लाइड कल्लाडी में मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ है.
यहां एक टनल रोड प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था. pic.twitter.com/mOfKf67dWQ
सरकार ने ठेकेदारों को ठहराया जिम्मेदार
हादसे के बाद राज्य सरकार ने शुरुआती जांच में ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन ने काफी पहले ही निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी हटाने के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद ठेकेदारों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की. मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि निर्देशों का पालन किया गया होता तो इस दुर्घटना को टाला जा सकता था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे की वजह केवल खराब मौसम नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और समय पर मिट्टी नहीं हटाया जाना भी रहा.
रेस्क्यू ऑपरेशन में बारिश बन रही बड़ी चुनौती
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और राज्य आपदा राहत बल की टीमें मौके पर पहुंच गईं. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि बीच-बीच में हो रही बारिश राहत कार्यों की रफ्तार को प्रभावित कर रही है. प्रशासन ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो रक्षा बलों की विशेष टीमों की भी मदद ली जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि मलबे में फंसे लोगों में इंजीनियर और सुरक्षा कर्मी शामिल हो सकते हैं. उनकी सुरक्षित तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों की भी मदद ली जा रही है.
सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोग
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने वायनाड सहित आसपास के कई जिलों में भारी बारिश को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में 204 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने की संभावना है. इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने आसपास रहने वाले लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू कर दिया है, ताकि किसी और अप्रिय घटना से बचा जा सके.
कामगार मौजूद होते तो बढ़ सकती थी त्रासदी
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय निर्माण स्थल पर नियमित मजदूर काम नहीं कर रहे थे. इसी वजह से जनहानि सीमित रही. यदि उस समय पूरी क्षमता के साथ निर्माण कार्य चल रहा होता, तो बड़ी संख्या में मजदूर मलबे की चपेट में आ सकते थे और हादसा कहीं अधिक भयावह रूप ले सकता था.
2024 में आई थी त्रासदी
वायनाड पहले भी भूस्खलन की बड़ी त्रासदी झेल चुका है. जुलाई 2024 में मेप्पाडी पंचायत के मुंडक्कई-चूरलमाला क्षेत्र में हुए विनाशकारी भूस्खलन में करीब 250 लोगों की मौत हो गई थी. इस बार का हादसा भी उसी पंचायत क्षेत्र में हुआ है, जिसने स्थानीय लोगों के बीच एक बार फिर भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है. लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी इलाकों की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है.
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