Income Tax Rules: डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन आज भी देश में बड़ी संख्या में लोग नकद लेन-देन को प्राथमिकता देते हैं. हालांकि, आयकर कानून के तहत कैश ट्रांजैक्शन को लेकर कई महत्वपूर्ण नियम लागू हैं. इनका उद्देश्य टैक्स चोरी पर रोक लगाना और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखना है. यदि कोई व्यक्ति तय सीमा से अधिक नकद लेन-देन करता है, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. ऐसे में हर टैक्सपेयर के लिए इन नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है.
2 लाख रुपये से अधिक नकद लेना पड़ सकता है महंगा
आयकर नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक ही व्यक्ति से, एक ही दिन में या किसी एक ही लेन-देन अथवा आयोजन के लिए 2 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि नकद में स्वीकार नहीं कर सकता. यदि इस नियम का उल्लंघन होता है तो संबंधित व्यक्ति पर प्राप्त पूरी राशि के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है.
लोन और डिपॉजिट के लिए भी तय है सीमा
यदि आप किसी से कर्ज लेते हैं या कोई डिपॉजिट स्वीकार करते हैं, तो 20 हजार रुपये या उससे अधिक की रकम नकद में नहीं ली जा सकती. ऐसी राशि केवल बैंकिंग माध्यम जैसे चेक, आरटीजीएस, एनईएफटी या अन्य डिजिटल भुगतान के जरिए ही स्वीकार की जानी चाहिए.
नकद में कर्ज चुकाने पर भी लागू है नियम
सिर्फ कर्ज लेना ही नहीं, बल्कि उसकी अदायगी पर भी आयकर कानून लागू होता है. यदि किसी लोन की राशि 20 हजार रुपये या उससे अधिक है, तो उसका भुगतान नकद में नहीं किया जा सकता. इसके लिए बैंकिंग चैनलों का उपयोग करना आवश्यक है.
कारोबारियों के लिए कैश पेमेंट की अलग सीमा
व्यापार करने वाले लोगों के लिए भी नकद भुगतान को लेकर स्पष्ट नियम हैं. यदि कोई कारोबारी एक दिन में किसी एक व्यक्ति को 10 हजार रुपये से अधिक नकद भुगतान करता है, तो वह इस खर्च को टैक्स में कटौती (डिडक्शन) के रूप में दावा नहीं कर सकता. हालांकि, माल ढुलाई या ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े मामलों में यह सीमा 35 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है.
नकद दान देने पर टैक्स छूट नहीं
यदि आप आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत टैक्स बचाने के लिए दान करते हैं, तो 2 हजार रुपये से अधिक का दान नकद में देने पर टैक्स लाभ नहीं मिलेगा. टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए दान डिजिटल माध्यम या चेक के जरिए करना जरूरी है.
बैंक से बड़ी नकद निकासी पर रहती है नजर
अपने बैंक खाते से नकद निकालने पर सामान्य रूप से कोई रोक नहीं है, लेकिन बड़ी राशि निकालने की जानकारी बैंक आयकर विभाग को भेजते हैं. यदि निकासी तय सीमा से अधिक होती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत बैंक टीडीएस भी काट सकता है.
प्रॉपर्टी खरीदते समय नकद भुगतान से बचें
घर, फ्लैट या जमीन की खरीद-बिक्री में भी नकद भुगतान के नियम लागू होते हैं. यदि किसी प्रॉपर्टी सौदे में 20 हजार रुपये या उससे अधिक की एडवांस राशि या भुगतान नकद में किया जाता है, तो संबंधित पक्षों पर कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है.
भुगतान को हिस्सों में बांटने से भी नहीं मिलेगी राहत
कुछ लोग नियमों से बचने के लिए बड़ी नकद राशि को कई छोटे-छोटे भुगतान में बांट देते हैं. लेकिन यदि ये सभी भुगतान एक ही सौदे या उद्देश्य से जुड़े हैं, तो आयकर विभाग इन्हें एक ही लेन-देन मानता है. ऐसे मामलों में भी नियमों के अनुसार कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है.
नियमों का पालन क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि नकद लेन-देन से जुड़े इन प्रावधानों का उद्देश्य वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और काले धन पर अंकुश लगाना है. इसलिए बड़ी राशि के लेन-देन में हमेशा बैंकिंग माध्यमों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है. इससे न केवल कानूनी परेशानियों से बचा जा सकता है, बल्कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहते हैं.
ये भी पढ़ें- 2008 अहमदाबाद ब्लास्ट केस में गुजरात HC का बड़ा फैसला; 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, 56 लोगों की गई थी जान