नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय के मिनीरत्न पीएसयू हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) को नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) मिल गया है. भारतीय नौसेना के अनुभवी अधिकारी रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) चंद्रशेखरन रघुराम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. 35 वर्षों से अधिक के सैन्य अनुभव के साथ अब वे भारत के रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालेंगे.
HSL के नए CMD बने रियर एडमिरल चंद्रशेखरन रघुराम
रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली मिनीरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने 2 जुलाई को घोषणा की कि रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) चंद्रशेखरन रघुराम, वीएसएम ने कंपनी के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) का कार्यभार संभाल लिया है.
रघुराम को 10 नवंबर 1989 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था. उन्होंने करीब 35 वर्षों तक नौसेना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं. इस दौरान उन्होंने नौसैनिक इंजीनियरिंग, जहाजों के रखरखाव, रणनीतिक योजना और नेतृत्व जैसे कई अहम क्षेत्रों में काम किया.
2017 में मिला था विशिष्ट सेवा पदक
रियर एडमिरल रघुराम को वर्ष 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (Vishisht Seva Medal) से सम्मानित किया गया था. उन्होंने नेवल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, लोणावला से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन की क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी, नेवल वॉर कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी उच्च शिक्षा प्राप्त की.
कई अहम नौसैनिक जहाजों और परियोजनाओं का अनुभव
अपने लंबे करियर में रघुराम ने आईएनएस गोमती और आईएनएस त्रिशूल जैसे युद्धपोतों पर सेवाएं दीं. वे आईएनएस त्रिशूल के कमीशनिंग क्रू का भी हिस्सा रहे. इसके अलावा उन्होंने नेवल डॉकयार्ड, टालवार क्लास युद्धपोतों की अफ्लोट सपोर्ट टीम और WESEE जैसी तकनीकी इकाइयों में भी काम किया. यहां उन्हें युद्धपोतों के उपकरणों के रखरखाव, आधुनिक युद्ध प्रणाली और तकनीकी एकीकरण का व्यापक अनुभव मिला.
नौसेना में संभाले कई बड़े पद
HSL में आने से पहले रघुराम असिस्टेंट चीफ ऑफ मैटेरियल के पद पर कार्यरत थे, जहां वे भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों और प्लेटफॉर्म के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इससे पहले वे आईएनएस वलसुरा के कमांडिंग ऑफिसर, इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर (नौसेना) में प्रिंसिपल डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, ईस्टर्न नेवल कमांड के कमांड इलेक्ट्रिकल ऑफिसर और वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक्निकल) जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड का कहना है कि नए CMD के नेतृत्व में कंपनी देश के रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगी. साथ ही समुद्री रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
क्या है हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की खासियत?
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड भारत के सबसे पुराने शिपयार्ड में से एक है. वर्षों के अनुभव के कारण कंपनी के पास जहाज निर्माण और मरम्मत का मजबूत तकनीकी आधार मौजूद है. कंपनी को ग्रीनफील्ड मिनीरत्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (CPSU) का दर्जा प्राप्त है, जिससे उसे वित्तीय और प्रशासनिक फैसले लेने में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता मिलती है. HSL की सबसे बड़ी विशेषज्ञता पनडुब्बियों (Submarine) के निर्माण और मरम्मत में है. इसके अलावा कंपनी डाइविंग सपोर्ट वेसल (Diving Support Vessel) जैसे विशेष जहाज भी बनाती है.
घाटे से मुनाफे तक का सफर
पिछले कुछ वर्षों में हिंदुस्तान शिपयार्ड ने शानदार वित्तीय सुधार दर्ज किया है. कभी घाटे में रहने वाली यह सरकारी कंपनी अब मुनाफे में चल रही है. बेहतर प्रबंधन, मजबूत ऑर्डर बुक और परिचालन क्षमता में सुधार की वजह से कंपनी की स्थिति लगातार मजबूत हुई है. ऐसे समय में रियर एडमिरल रघुराम की नियुक्ति को कंपनी के भविष्य और भारत के रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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