वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने खर्ग आइलैंड पर जोरदार बमबारी की है. उनके अनुसार इस हमले में द्वीप पर मौजूद कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है.
खर्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में स्थित एक महत्वपूर्ण द्वीप है और इसे ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का सबसे अहम केंद्र माना जाता है. यह द्वीप ईरान के तट से लगभग 25–30 किलोमीटर दूर है और यहां से देश का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल निर्यात किया जाता है.
ट्रंप का दावा – सैन्य ठिकाने तबाह
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मध्य पूर्व के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक को अंजाम दिया. उन्होंने दावा किया कि खर्ग आइलैंड पर मौजूद ईरान के सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है.
हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल द्वीप के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना नहीं बनाया गया है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में किसी तरह की रुकावट डाली जाती है, तो अमेरिका तेल सुविधाओं पर भी हमला कर सकता है.
14 दिनों के संघर्ष में पहली बार निशाना
रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 14 दिनों से जारी संघर्ष में यह पहली बार है जब खर्ग आइलैंड को निशाना बनाया गया है. इससे पहले अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल अड्डों और परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे, लेकिन इस द्वीप को अब तक निशाना नहीं बनाया गया था.
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि ट्रंप प्रशासन खर्ग आइलैंड को लेकर सैन्य रणनीति पर विचार कर रहा था, जिसमें इस द्वीप पर कब्जा करने का विकल्प भी शामिल था.
ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए अहम
खर्ग आइलैंड को ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र माना जाता है. यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल टैंकरों में भरकर दुनिया के कई देशों को भेजा जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस द्वीप के ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो ईरान की तेल से होने वाली बड़ी आय तुरंत रुक सकती है.
इसी बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के लिए करीब 2500 सैनिकों और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप को भेजने का आदेश भी दिया है.
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