LPG Shortage: देश के कई हिस्सों से रसोई गैस की कमी की खबरें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी की सप्लाई में कोई कमी नहीं है. सरकार के अनुसार लोगों को जो परेशानी हो रही है, उसकी मुख्य वजह कालाबाजारी है. इसको रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई सामान्य रूप से जारी है. साथ ही घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी की गई है. इसके बावजूद विपक्षी दलों का आरोप है कि कई शहरों में लोगों को सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है.
ईंधन की सप्लाई सामान्य होने का दावा
सरकार का कहना है कि देशभर के लगभग एक लाख पेट्रोल पंपों में कहीं से भी पेट्रोल या डीजल खत्म होने की सूचना नहीं मिली है. इसके अलावा पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई भी सामान्य बताई जा रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि घरों, अस्पतालों और जरूरी संस्थानों को एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है.
विपक्ष ने उठाए सवाल
सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने एलपीजी संकट की खबरों को अफवाह बताया है और विपक्ष पर लोगों में घबराहट फैलाने का आरोप लगाया है. वहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं और कई जगहों पर लोग गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि कई शहरों में गैस की उपलब्धता कम हो गई है.
उत्पादन में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा के अनुसार देश में 5 मार्च की तुलना में रिफाइनरियां अब करीब 30 प्रतिशत अधिक एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत में ईंधन की सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि एलपीजी की आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है. इसके अलावा कमर्शियल गैस सिलेंडर भी राज्य सरकारों को उपलब्ध कराए गए हैं ताकि जरूरत के अनुसार उनका वितरण किया जा सके.
देश में पर्याप्त रिफाइनिंग क्षमता
सरकार के अनुसार भारत की कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता करीब 258 मिलियन मीट्रिक टन है और देश की रिफाइनरियां फिलहाल पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं. इसी वजह से भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है.
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