अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली थी डील, तभी आया एक कॉल और बंद हो गई बातचीत! क्यों नहीं हुआ सीजफायर?

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई उच्च-स्तरीय वार्ता से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन यह बातचीत अचानक ऐसे मोड़ पर आकर टूट गई, जहां समझौता लगभग तय माना जा रहा था.

Why no ceasefire in Islamabad talks between America and Iran
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US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई उच्च-स्तरीय वार्ता से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन यह बातचीत अचानक ऐसे मोड़ पर आकर टूट गई, जहां समझौता लगभग तय माना जा रहा था. अब इस कूटनीतिक विफलता के पीछे एक फोन कॉल को अहम वजह बताया जा रहा है, जिसने पूरे समीकरण को बदल दिया.

दोनों देशों के बीच यह मैराथन बातचीत करीब 21 घंटे तक चली. शुरुआत में माहौल सकारात्मक बताया जा रहा था और कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की खबरें भी सामने आ रही थीं. पाकिस्तान की मेजबानी में हो रही इस वार्ता का मकसद क्षेत्रीय तनाव कम करना और स्थायी समाधान तलाशना था.

लेकिन जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, हालात बदलने लगे और अंततः यह प्रक्रिया बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई.

एक फोन कॉल से बदला पूरा खेल

ईरान की ओर से दावा किया गया है कि बातचीत के दौरान एक फोन कॉल ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. ईरान के मुताबिक, यह कॉल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को किया था.

कहा जा रहा है कि इस कॉल के बाद वार्ता का फोकस बदल गया और अमेरिका का रुख पहले से ज्यादा सख्त हो गया, जिससे संभावित समझौता टूट गया.

ईरान के विदेश मंत्री का दावा

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस कॉल के बाद बातचीत का ध्यान अमेरिका-ईरान मुद्दों से हटकर इजरायल के हितों की ओर चला गया.

उनका आरोप है कि अमेरिका वार्ता के जरिए वह हासिल करना चाहता था, जो वह युद्ध के माध्यम से नहीं कर पाया. अराघची के मुताबिक, ईरान ने पूरी ईमानदारी से बातचीत की, लेकिन अंतिम समय में बदले रुख ने समझौते की संभावनाओं को खत्म कर दिया.

हालांकि, इस कथित फोन कॉल को लेकर अमेरिका की ओर से न तो पुष्टि की गई है और न ही कोई खंडन सामने आया है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है.

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा

इस पूरी बातचीत के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अमेरिका ने यहां अपने और सहयोगी देशों के जहाजों के लिए निर्बाध आवाजाही की मांग रखी थी.

इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने और उसके पास मौजूद यूरेनियम भंडार को सौंपने की शर्त भी रखी. जेडी वेंस ने इसे अमेरिका का “अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव” बताया, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया.

युद्धविराम की समयसीमा और बढ़ता तनाव

यह वार्ता ऐसे समय में विफल हुई है, जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए दो सप्ताह का युद्धविराम लागू किया गया था. अब इस सीजफायर की अवधि खत्म होने में कुछ ही दिन बचे हैं, जिससे हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं.

ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने यहां बारूदी सुरंगें, ड्रोन और मिसाइलें तैनात कर दी हैं और गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क की मांग की जा रही है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जा रहा है.

तेल बाजार पर पड़ा सीधा असर

इस कूटनीतिक विफलता का असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. खासकर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.

युद्धविराम से पहले तेल की कीमतें करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. बाद में बातचीत शुरू होने पर यह घटकर लगभग 95 डॉलर तक आ गईं, लेकिन अब वार्ता विफल होने के बाद कीमतों में फिर से तेजी आने की आशंका जताई जा रही है.

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