Bangladesh China Weapons Deal: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अपनी सेना को “अत्याधुनिक और आत्मनिर्भर” बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. लेकिन इस प्रक्रिया में उसका चीन पर बढ़ता झुकाव वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है.
हाल ही में चीन से जे-10सी (J-10C) लड़ाकू विमान की खरीद के बाद अब बांग्लादेश ने बीजिंग से खतरनाक SY-400 बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम खरीदने का करार किया है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा न केवल दक्षिण एशिया की सैन्य संतुलन को प्रभावित करेगा बल्कि भारत के लिए भी रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है.
2030 तक ‘मॉडर्न आर्मी’ का लक्ष्य
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश ने अपनी सेना को वर्ष 2030 तक पूरी तरह “आधुनिक युद्ध क्षमता” से लैस करने का लक्ष्य रखा है. इसी योजना के तहत, चीन के साथ एक नया रक्षा समझौता किया गया है, जिसमें SY-400 बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम शामिल है. इससे पहले यूनुस सरकार ने बीजिंग से J-10C मल्टीरोल फाइटर जेट की खरीद की थी, जो चीनी वायुसेना के बेड़े का हिस्सा भी है.
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह सौदा “Bangladesh Forces Goal-2030” प्रोग्राम के तहत किया गया है, एक ऐसी रणनीति जिसके जरिए ढाका अपनी थल, वायु और नौसेना को उन्नत तकनीकों से लैस करना चाहता है.
क्या है SY-400 बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम?
‘द वीक’ मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, SY-400, जिसे चीन में DF-12A नाम से जाना जाता है, एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है. इसे पहली बार वर्ष 2008 में Zhuhai Airshow के दौरान प्रदर्शित किया गया था. यह मिसाइल पहले म्यांमार और कतर जैसे देशों को बेची जा चुकी है और अब बांग्लादेश इसका नवीनतम ग्राहक बना है.
मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं:
रेंज: 150 से 200 किलोमीटर तक
वारहेड क्षमता: 200 से 300 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम
गति: 5 मैक (आवाज़ से पांच गुना तेज़)
लंबाई: लगभग 6 मीटर
मारक सटीकता: उन्नत रडार सिस्टम और GPS गाइडेंस की मदद से अंतिम चरण में टारगेट पर सटीक प्रहार
इस मिसाइल को “स्मार्ट मिसाइल” भी कहा जाता है क्योंकि यह अपने लक्ष्य पर पहुंचने से पहले ऊंचाई और दिशा बदलने में सक्षम होती है, जिससे रडार सिस्टम को इसे ट्रैक करना कठिन हो जाता है.
क्यों बढ़ रहा है बांग्लादेश का चीन पर भरोसा?
बांग्लादेश के रक्षा आयात में पिछले कुछ वर्षों से चीन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश द्वारा खरीदे गए 70% हथियार अब चीन से आते हैं.
शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार के आने के बाद ढाका और बीजिंग के रिश्ते और भी मजबूत हो गए हैं. यूनुस प्रशासन ने चीन के साथ नज़दीकी बढ़ाने के लिए कई आर्थिक और रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि यूनुस सरकार चीन के साथ सैन्य साझेदारी बढ़ाकर न केवल बीजिंग को साधने की कोशिश कर रही है बल्कि अमेरिका और भारत जैसे देशों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बनाना चाहती है.
सस्ता सौदा या रणनीतिक जाल?
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के मुताबिक, चीन अपने हथियार “कम कीमत” और “आसान भुगतान शर्तों” पर बेचता है, जिससे विकासशील देशों को यह आकर्षक विकल्प लगता है. अमेरिका, फ्रांस या रूस की तुलना में चीन का हथियार बाजार सस्ता और सुलभ माना जाता है.
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह नीति केवल “आर्थिक लाभ” के लिए नहीं बल्कि भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पाकिस्तान की तरह अब बांग्लादेश भी उसी रास्ते पर चलता दिखाई दे रहा है. पिछले पाँच वर्षों में पाकिस्तान ने अपने 80% से अधिक हथियार चीन से खरीदे हैं, और अब बांग्लादेश भी उसी दिशा में बढ़ रहा है.
भारत और दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय
बांग्लादेश की यह नई रक्षा नीति भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा कर सकती है. भारत के पूर्वोत्तर सीमावर्ती इलाकों से सटे बांग्लादेश में चीन की सैन्य तकनीक की मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकती है.
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