अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को बड़ा हथियार बनाया है. उन्होंने अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत भारत समेत 60 से ज्यादा देशों पर 10 से 12.5 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. भारत पर 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सेक्शन 301 क्या है और ट्रंप इसका इस्तेमाल बार-बार क्यों करते हैं?
क्या है सेक्शन 301?
सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 का एक कानून है. इसके तहत अमेरिका किसी भी ऐसे देश के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, जिसकी व्यापार नीति उसे अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदायक या भेदभावपूर्ण लगती है.
इस कानून के तहत पहले जांच की जाती है. अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो अमेरिका उस देश के सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है. इसके अलावा आयात पर रोक या दूसरी व्यापारिक पाबंदियां भी लगाई जा सकती हैं.
ट्रंप इसे इतना अहम क्यों मानते हैं?
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से 'अमेरिका फर्स्ट' नीति की बात करते रहे हैं. उनका मानना है कि अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों पर टैरिफ लगाया जाना चाहिए.
चीन के साथ शुरू हुआ ट्रेड वॉर भी इसी सेक्शन 301 के तहत शुरू किया गया था. अब ट्रंप प्रशासन ने इस कानून के दायरे में जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों को भी शामिल कर दिया है.
अमेरिका का कहना है कि जब किसी देश में जबरन मजदूरी से सामान बनता है, तो उसकी लागत कम हो जाती है और वह दुनिया के बाजार में सस्ता बिकता है. इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है.
भारत पर 10 फीसदी टैरिफ क्यों लगाया गया?
व्हाइट हाउस के मुताबिक भारत ने जबरन मजदूरी रोकने के लिए कानून बनाए हैं और इस दिशा में कुछ कदम भी उठाए हैं. लेकिन अमेरिका का कहना है कि इन कानूनों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा.
इसी वजह से भारत को 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ वाली सूची में रखा गया है. यानी अमेरिका ने माना कि भारत ने कुछ प्रयास किए हैं, इसलिए उस पर 12.5 फीसदी की जगह 10 फीसदी शुल्क लगाया गया.
भारत के साथ किन देशों को रखा गया?
10 फीसदी टैरिफ वाली सूची में भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, कंबोडिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास और त्रिनिदाद एंड टोबैगो जैसे देश भी शामिल हैं.
अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने कुछ नियम बनाए हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन अभी भी नहीं हो रहा.
चीन, ब्रिटेन और जापान पर ज्यादा टैरिफ क्यों?
अमेरिका ने चीन, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है.
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि इन देशों में जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त कानूनी व्यवस्था नहीं है या फिर नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा.
आगे क्या हो सकता है?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन जल्द टैरिफ का एक और दौर ला सकता है. इस बार उन देशों पर कार्रवाई हो सकती है, जो अपनी कंपनियों को भारी सरकारी सब्सिडी देकर सस्ते दाम पर सामान विदेशों में बेचते हैं.
अमेरिका का कहना है कि इससे उसके घरेलू उद्योगों को नुकसान होता है.
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लागू होने से अमेरिका को होने वाला निर्यात महंगा हो सकता है.
इसका सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल और दूसरे श्रम-आधारित उद्योगों पर पड़ सकता है. हालांकि भारत पर लगाया गया टैरिफ चीन से कम है, फिर भी भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है.
माना जा रहा है कि भारत सरकार इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत कर सकती है और दोनों देशों के बीच इस फैसले को लेकर आगे चर्चा हो सकती है.
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