EPF Salary Limit: राजधानी दिल्ली में आज होने वाली मोदी कैबिनेट की बैठक पर नौकरीपेशा लोगों की नजरें टिकी हैं. बैठक में सरकार कई अहम प्रस्तावों पर फैसला ले सकती है, जिनमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है. अगर इसे मंजूरी मिलती है तो संगठित क्षेत्र में काम करने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लिए पीएफ कवरेज का दायरा बढ़ सकता है.
EPF की अनिवार्य वेतन सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
मौजूदा नियमों के तहत 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) वाले कर्मचारियों के लिए EPF में योगदान अनिवार्य है. प्रस्तावित बदलाव के तहत इस वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जा सकता है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने पर 25 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी और DA पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य EPF कवरेज के दायरे में लाया जा सकेगा.
कर्मचारियों की सैलरी पर भी पड़ेगा असर
EPF की सीमा बढ़ने का सीधा असर कर्मचारियों की मासिक सैलरी पर भी दिखाई दे सकता है. पीएफ में ज्यादा योगदान होने की स्थिति में इन-हैंड सैलरी कुछ कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड में ज्यादा रकम जमा होगी. सरकार का फोकस संगठित क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने पर है.
डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को लेकर भी फैसला संभव
कैबिनेट बैठक में डिजिटल डेटा की सुरक्षा से जुड़ा प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हो सकता है. सरकार डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के गठन के लिए नए पदों को मंजूरी देने पर विचार कर सकती है. इस बोर्ड के जरिए देश में डिजिटल पर्सनल डेटा की सुरक्षा से जुड़े नियमों को लागू करने की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
रूस के साथ क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौता
बैठक में रूस के साथ क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग को लेकर प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी चर्चा हो सकती है. क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल बैटरी, आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र समेत कई अहम उद्योगों में होता है. ऐसे में इस समझौते को भारत की महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है.
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