ट्रंप ने फिर फोड़ा टैरिफ बम, भारत सहित 60 देशों पर लगाया 10 फीसदी टैक्स, पाकिस्तान पर भी कसा शिकंजा

Trump Tariff: अमेरिका ने वैश्विक व्यापार और मानवाधिकारों को जोड़ते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है.

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Trump Tariff: अमेरिका ने वैश्विक व्यापार और मानवाधिकारों को जोड़ते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित 60 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है. अमेरिका का दावा है कि इन देशों से आने वाले कुछ सामानों के उत्पादन में जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल किया गया और संबंधित देशों ने ऐसे उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए. इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है.

ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत उठाया गया कदम

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह कार्रवाई 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत की गई है. USTR के मुताबिक कुल 60 अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया, क्योंकि इन देशों पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को प्रभावी ढंग से रोकने में विफल रहने का आरोप है. ग्रीर ने कहा कि यह कदम केवल व्यापारिक कार्रवाई नहीं बल्कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और वैश्विक स्तर पर निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक शुरुआत है. नए आदेश की घोषणा उस समय की गई जब सभी देशों पर लागू 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की समय-सीमा समाप्त होने वाली थी.

भारत को मिली आंशिक राहत

नई व्यवस्था में भारत, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया गया है. इससे पहले भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल था जिन पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ प्रस्तावित था. अमेरिकी अधिकारियों ने अपने नोट में यह भी स्वीकार किया कि जून में प्रस्तावित टैरिफ के बाद भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया. 14 जून को लागू किए गए इस संशोधन को अमेरिका ने सकारात्मक कदम माना, जिसके बाद भारत को अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली अमेरिका की रणनीति

दरअसल, ट्रंप प्रशासन की यह नई नीति उस कानूनी विवाद के बाद सामने आई है जिसमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए पिछले वर्ष के पारस्परिक टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया था. इसके बाद प्रशासन ने नई कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए धारा 301 के तहत अलग-अलग देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू की. इसी प्रक्रिया के आधार पर अब नए टैरिफ लागू किए गए हैं, जिन्हें अमेरिका मानवाधिकारों और निष्पक्ष व्यापार के मानकों से जोड़कर देख रहा है.

भारत ने जताई आपत्ति

भारत ने USTR की दोनों जांचों पर अपनी असहमति दर्ज कराई है. भारतीय पक्ष का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement) वार्ता के जरिए किया जा सकता है. भारत का मानना है कि व्यापारिक विवादों को बातचीत और सहयोग के माध्यम से सुलझाना दोनों देशों के हित में होगा. फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और आने वाले समय में इस विषय पर और चर्चा होने की संभावना है.

भारत-अमेरिका व्यापार पर क्या पड़ सकता है असर?

अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार है. वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर का था. ऐसे में 10 प्रतिशत टैरिफ का असर कुछ निर्यात क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ सकता है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा जबरन मजदूरी से जुड़े नियमों को सख्त किए जाने और दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता के कारण भविष्य में इस मुद्दे का समाधान निकलने की संभावना बनी हुई है.

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