रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार, 26 मार्च 2026 को मध्य पूर्व युद्ध पर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 महामारी जितना गंभीर प्रभाव डाल सकता है. पुतिन का कहना था कि इस युद्ध की वजह से पहले ही आपूर्ति श्रृंखला, उत्पादन, और लॉजिस्टिक में भारी बाधाएं आ चुकी हैं, और हाइड्रोकार्बन, धातुओं, और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर दबाव बढ़ गया है. उनकी यह चेतावनी दर्शाती है कि इस संकट का क्या परिणाम होगा, इसका अनुमान कोई भी नहीं लगा सकता.
पुतिन की चेतावनी
पुतिन ने बिजनेस फोरम में अपने संबोधन के दौरान कहा कि युद्ध में शामिल देशों के पास यह कहने का कोई तरीका नहीं है कि आगे क्या होगा. उन्होंने इसे कोविड-19 महामारी के समान संकट बताते हुए कहा, "यह संकट पूरी दुनिया की आर्थिक गति को धीमा कर सकता है, जैसे कि कोरोना महामारी ने किया था." वैश्विक अर्थव्यवस्था अब चरमरा रही है और पुतिन के मुताबिक, इस संघर्ष में शामिल देशों को खुद यह भी नहीं पता कि यह संकट कहां तक जाएगा. रूस के लिए तो यह स्थिति और भी जटिल हो गई है, क्योंकि यह युद्ध उनके लिए कई मोर्चों पर चुनौतियां लेकर आया है.
तेल की कीमतों में उछाल
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावनाएं अब कमजोर होती जा रही हैं, और इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिला. 26 मार्च 2026 को, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई. ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड की कीमत 107.54 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 94.71 डॉलर प्रति बैरल हो गई. यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व संकट का असर वैश्विक बाजार पर बढ़ता जा रहा है.
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने शांति समझौते को स्वीकार नहीं किया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है, और अब वह समझौता करने के लिए "भीख" मांग रहा है. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि तेहरान अमेरिकी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन युद्ध समाप्त करने के लिए अभी तक कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है.
युद्धविराम की कोशिशें और पाकिस्तान की मध्यस्थता
अमेरिका ने ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना प्रस्तुत की है, जिसे ईरान ने अपनी 5 शर्तों के साथ स्वीकार करने की बात की है. पाकिस्तान ने भी इस संघर्ष के समाधान के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है. वहीं, अमेरिका ने अपनी सेना को और तैनात करने का फैसला किया है. पेंटागन ने ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए 'मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट' के रूप में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की योजना बनाई है. इस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता जा रहा है, और इस संकट के समाधान की राह अभी भी दूर नजर आती है.
अमेरिका की सैन्य तैयारी और इजराइल का समर्थन
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत, क्षेत्र में 5,000 मरीन और कई अन्य नौसेना कर्मियों को तैनात किया जाएगा. इस बीच, इजराइली अधिकारी भी युद्धविराम योजना को लेकर हैरान हैं, और उन्होंने इसे खारिज किया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ संघर्ष जारी रहे.
ये भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका की लड़ाई से भरा रूस का खजाना, हर दिन तिजोरी में आ रहे 71 अरब रुपये, कैसे हो रही कमाई?