मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पीएम मोदी और ट्रंप की हुई बातचीत, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

PM Modi And Trump Conversation: पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पहली बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है. इस बातचीत में मिडिल-ईस्ट की स्थिति और खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चर्चा हुई.

PM Modi and Trump conversation amid Middle East tension these issues were discussed
Image Source: ANI/ File

PM Modi And Trump Conversation: पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पहली बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है. इस बातचीत में मिडिल-ईस्ट की स्थिति और खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चर्चा हुई.

इससे पहले पीएम मोदी मसूद पेजेश्कियन और बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और बहरीन समेत कई देशों के नेताओं से भी संपर्क किया है. उन्होंने सभी से अपील की है कि मिलकर क्षेत्र में शांति बनाए रखने की कोशिश की जाए.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. मौजूदा हालात में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है.

पीएम मोदी का मानना है कि इस रास्ते को बंद रखना किसी के हित में नहीं है और इसे बातचीत के जरिए खोलना जरूरी है. उन्होंने सभी पक्षों से संवाद और शांति का रास्ता अपनाने की अपील की है.

जंग का बढ़ता असर

इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब लंबे समय तक खिंच गया है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. ऐसे में भारत की कोशिश है कि हालात और न बिगड़ें और बातचीत के जरिए समाधान निकले.

डोनाल्ड ट्रंप से पीएम मोदी की बातचीत को भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. भारत चाहता है कि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे, क्योंकि इसका असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

तेल और गैस की कीमतों में उछाल

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसके कारण एशिया से लेकर यूरोप तक कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह कुछ देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने नहीं देगा. इसका असर अब आम लोगों पर भी दिखने लगा है, क्योंकि कई जगह ईंधन महंगा हो गया है और कुछ देशों में कमी की स्थिति भी बन रही है.

भारत की चिंता और कोशिश

भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति काफी अहम है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में तेल आयात होता है. ऐसे में सरकार चाहती है कि जल्द से जल्द हालात सामान्य हों और सप्लाई फिर से शुरू हो सके. नरेंद्र मोदी लगातार अलग-अलग देशों के नेताओं से बात कर रहे हैं, ताकि तनाव कम किया जा सके और शांति का रास्ता निकले.

कुल मिलाकर, मिडिल-ईस्ट का यह संकट अब सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. ऐसे में सभी देशों की नजर अब बातचीत और समाधान पर टिकी हुई है.

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