ईरान संकट के बीच भारतीय नौसेना तैनात, होर्मुज में उतारे पांच युद्धपोत, कैसे कर रहे जहाजों की रखवाली?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर हो रही है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से हर दिन दुनिया के करीब 20 से 25 फीसदी कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है.

Indian Navy deploys five warships in Hormuz amid Iran crisis
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

Indian Navy: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर हो रही है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से हर दिन दुनिया के करीब 20 से 25 फीसदी कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है. ऐसे में जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव बढ़ा, तो इस रास्ते पर खतरा भी कई गुना बढ़ गया.

हालात ऐसे बन गए कि कुछ देशों के जहाजों को इस मार्ग पर रोक दिया गया. पाकिस्तान के जहाजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि क्या वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी? क्या भारत तक तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा?

इन्हीं चिंताओं के बीच भारत ने चुपचाप एक मजबूत रणनीति तैयार की और उसे लागू भी कर दिया. भारतीय नौसेना ने अपने कई युद्धपोत समुद्र में तैनात कर दिए हैं, जो भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाने और उनकी रक्षा करने का काम कर रहे हैं. यही वजह है कि इन जहाजों को प्रतीकात्मक तौर पर ‘पांडव’ कहा जा रहा है.

क्या है भारत का मिशन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के तहत पांच से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए हैं. इनका मकसद सीधे युद्ध में शामिल होना नहीं, बल्कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालना है.

यह मिशन सिर्फ साधारण एस्कॉर्ट नहीं है, बल्कि एक मल्टी-लेयर सुरक्षा सिस्टम की तरह काम करता है, जिसमें रणनीति, तकनीक और कूटनीति तीनों का उपयोग किया जा रहा है. इसी वजह से खतरनाक माहौल के बावजूद भारतीय जहाज इस रास्ते को पार कर पा रहे हैं.

कैसे काम करता है यह ऑपरेशन?

भारत के लिए तेल और गैस लेकर आने वाले जहाज आमतौर पर सऊदी अरब के बड़े बंदरगाहों से निकलते हैं और फारस की खाड़ी के रास्ते होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंचते हैं.

पहले यह यात्रा सामान्य थी, लेकिन मौजूदा हालात में हर कदम पर खतरा है. ऐसे में भारतीय नौसेना पहले से ही जहाजों को गाइड करती है—

  • कौन सा रास्ता सुरक्षित रहेगा
  • कब आगे बढ़ना सही होगा
  • किन क्षेत्रों से बचना चाहिए

इससे जहाज जोखिम वाले इलाकों से बचकर निकल पाते हैं.

जहाजों की सुरक्षा कैसे हो रही है?

भारतीय नौसेना सीधे होर्मुज स्ट्रेट के अंदर मौजूद नहीं रहती, लेकिन जैसे ही जहाज इस संवेदनशील क्षेत्र को पार करते हैं, ओमान की खाड़ी में तैनात भारतीय युद्धपोत उन्हें एस्कॉर्ट करना शुरू कर देते हैं.

इसके अलावा:

  • जहाजों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाता है
  • रीयल टाइम जानकारी दी जाती है
  • संभावित खतरों के बारे में पहले से चेतावनी दी जाती है

इस तरह जहाजों को हर समय सुरक्षा कवच मिलता है.

सिर्फ एस्कॉर्ट नहीं, कूटनीति भी अहम

यह ऑपरेशन केवल सैन्य तैनाती तक सीमित नहीं है. इसके पीछे मजबूत कूटनीतिक प्रयास भी शामिल हैं.

भारत क्षेत्र के कई देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि जहाजों के सुरक्षित गुजरने का रास्ता सुनिश्चित किया जा सके. यह बैकचैनल डिप्लोमेसी इस मिशन का अहम हिस्सा है.

समुद्र के अंदर छिपे खतरे और टेक्नोलॉजी

होर्मुज स्ट्रेट का खतरा सिर्फ सतह पर नहीं है, बल्कि समुद्र के अंदर भी कई जोखिम छिपे होते हैं, जैसे—

  • समुद्री माइंस
  • चट्टानें
  • गहराई में बदलाव

इनसे बचने के लिए हाइड्रोग्राफिक चार्ट का इस्तेमाल किया जाता है. ये चार्ट समुद्र के अंदर की पूरी जानकारी देते हैं, जिससे जहाज सुरक्षित रास्ता चुन पाते हैं. भारत के पास इस क्षेत्र के सटीक चार्ट मौजूद हैं, जो उसे रणनीतिक बढ़त देते हैं.

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