मॉस्को: ईरान और अमेरिका के बीच 27 दिन से जारी संघर्ष ने मिडल ईस्ट, यूरोप और दक्षिण एशिया को हिला कर रख दिया है. हालांकि इस युद्ध का एक अप्रत्यक्ष फायदा रूस को हो रहा है. अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद रूस ने अपनी तेल बिक्री को तीव्र गति से बढ़ाया है और प्रतिदिन 71 अरब रुपए की रिकॉर्ड कमाई कर रहा है. रूस की यह स्थिति पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक तेल बिक्री के चलते बनी है.
प्रतिदिन 71 अरब रुपए की कमाई
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण रूस की तेल बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है. रूस, मार्च 2026 में लगभग 24 अरब डॉलर का तेल बेचने का अनुमान लगा रहा है. इसका मतलब यह है कि रूस प्रतिदिन 760 मिलियन डॉलर के तेल की बिक्री कर रहा है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 71 अरब रुपए के बराबर है. रूस के लिए यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, खासकर तब जब 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते रूस की तेल बिक्री में भारी गिरावट आई थी.
कैसे बढ़ी रूस की तेल कमाई?
होर्मुज स्ट्रेट का बंद: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा मंडरा रहा है और यह रास्ता पूरी तरह से बंद होने की कगार पर है. इस मार्ग से तेल की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे दुनिया के विभिन्न देश अब रूस से तेल खरीद रहे हैं. इसके अलावा, अमेरिका ने भी दूसरे देशों को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे दी है.
मूल्य वृद्धि और उच्च कीमतों पर बिक्री: पहले रूस तेल को ऑफर पर बेचता था, लेकिन अब वह अपनी कीमतों को सामान्य स्तर पर लाकर बेच रहा है. कीव इंस्टीट्यूट के अनुसार, अब रूसी तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल है, जो रूस की कमाई में अचानक उछाल लेकर आया है.
भारत और चीन का बढ़ता तेल आयात: भारत और चीन जैसे बड़े देशों ने रूस से तेल खरीदने की मात्रा में जबरदस्त वृद्धि की है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने फरवरी 2026 के मुकाबले मार्च 2026 में रूस से 72% ज्यादा तेल खरीदने का निर्णय लिया है. यह रूस के लिए बहुत बड़ा आर्थिक फायदा साबित हो रहा है.
ईरान को मदद पहुंचा रहा रूस?
ईरान-अमेरिका जंग में रूस की भूमिका सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं है. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, रूस इस संघर्ष में ईरान की मदद कर रहा है. रूस, ईरान को खाद्य सामाग्री के अलावा ड्रोन और हथियार भी भेज रहा है. इसके अलावा, रूस इजराइल और अमेरिकी ठिकानों की जानकारी भी ईरान को देता है, जिसे वह सैटेलाइट के माध्यम से जुटाता है. इन जानकारियों का इस्तेमाल ईरान अपने मिसाइल हमलों को अंजाम देने के लिए करता है. हालांकि, रूस ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उसने केवल ईरान को कुछ जरूरी दवाइयां भेजी हैं.
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