'हम दलाल देश नहीं बन सकते...', फटे में टांग अड़ाने पहुंचा पाकिस्तान तो एस जयशंकर कह दी दो टूक बात

मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट को लेकर बुधवार, 25 मार्च 2026 को भारत सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि भारत इस संघर्ष में किसी भी दलाल देश के रूप में मध्यस्थता नहीं कर सकता.

Jaishankar statement on Pakistan mediation in the Iran-US war
Image Source: ANI

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट को लेकर बुधवार, 25 मार्च 2026 को भारत सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि भारत इस संघर्ष में किसी भी दलाल देश के रूप में मध्यस्थता नहीं कर सकता. यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने जंग खत्म करने की बात कही है कि क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है.

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भारत का दो टूक रुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में एक पोस्ट में दावा किया था कि पाकिस्तान मिडिल ईस्ट संकट को समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत में मदद करने के लिए मेज़बानी करने को तैयार है. शरीफ ने कहा था कि अगर अमेरिका और ईरान इस पर सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान इस संघर्ष को सुलझाने के लिए मदद देने के लिए तैयार है. वहीं पाकिस्तान की मध्यस्थता से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने दो टूक कहा कि हम दलाल देश नहीं हो सकते हैं. 

अमेरिका-ईरान युद्ध और पीएम मोदी की बातचीत

सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच इस युद्ध को लेकर क्या बातचीत हुई थी. इस सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी ने ट्रंप से स्पष्ट रूप से कहा था कि युद्ध को समाप्त करना चाहिए क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है.

इसके अलावा, विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान को ईरान के साथ वार्ता में शामिल करने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया 1981 से ही जारी है, जब अमेरिका ने पाकिस्तान को एक मध्यस्थ के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की थी.

कच्चे तेल और गैस की कोई कमी नहीं

सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया के युद्ध और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभाव पर सरकार से सवाल किए. इस पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल और गैस की कोई कमी नहीं है. विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त भंडार है और हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह से पूरा करने के लिए तैयार हैं. इसके साथ ही, सरकार ने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इस संकट के कारण किसी भी प्रकार की घबराहट की कोई जरूरत नहीं है.

ये भी पढ़ें: पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं... मिडिल ईस्ट संकट पर सर्वदलीय बैठक में सरकार ने और क्या-क्या कहा?