अमेरिका की 'ब्लैकलिस्ट' में जाएगा भारत! शुरू हुई अनफेयर ट्रेड की जांच, इन 16 देशों पर लगेगा टैरिफ?

क्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद अमेरिका ने भारत समेत कई देशों के खिलाफ नई व्यापार जांच शुरू करने का फैसला किया है. अमेरिकी प्रशासन ने कुल 16 देशों के खिलाफ यह जांच शुरू करने की घोषणा की है.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Unfair Trade Probe: मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद अमेरिका ने भारत समेत कई देशों के खिलाफ नई व्यापार जांच शुरू करने का फैसला किया है. अमेरिकी प्रशासन ने कुल 16 देशों के खिलाफ यह जांच शुरू करने की घोषणा की है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बताया कि यह जांच उनकी रेसिप्रोकल टैरिफ नीति से जुड़े मामले के बाद शुरू की जा रही है. हाल ही में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने इस नीति को अवैध करार दिया था. इसके बाद अमेरिकी सरकार ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत नई जांच शुरू करने का निर्णय लिया है.

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रियर ने कहा कि इस जांच के बाद जिन देशों पर कार्रवाई जरूरी समझी जाएगी, उनके उत्पादों पर नया आयात शुल्क लगाया जा सकता है.

इन 16 देशों को शामिल किया गया

इस जांच की सूची में भारत के अलावा कई बड़े व्यापारिक साझेदार देश भी शामिल हैं. इनमें मेक्सिको, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, ताइवान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, बांग्लादेश और थाईलैंड शामिल हैं.

जेमीसन ग्रियर ने कहा कि आगे भी अलग-अलग देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत नई जांच शुरू की जा सकती है. हालांकि उन्होंने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी.

क्यों शुरू की जा रही है यह जांच

समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार जेमीसन ग्रियर ने कहा कि अमेरिका को लगता है कि कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों ने अपनी उत्पादन क्षमता जरूरत से ज्यादा बढ़ा ली है. उनका कहना है कि यह उत्पादन घरेलू और वैश्विक मांग से मेल नहीं खाता.

उन्होंने कहा कि कई देश बड़ी मात्रा में सामान बनाकर उसे अमेरिका में भेज रहे हैं. इससे अमेरिकी उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है. सरकार का मानना है कि इस जांच के जरिए देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत किया जा सकता है और अमेरिकी कामगारों के लिए बेहतर वेतन वाली नौकरियां पैदा की जा सकती हैं.

जांच की प्रक्रिया क्या होगी

धारा 301 के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कार्यालय इस मामले में लिखित बयान मंगाएगा और एक सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित की जाएगी. इस दौरान जिन देशों के खिलाफ जांच हो रही है, उनसे भी बातचीत की जाएगी.

जांच और विश्लेषण के बाद सरकार तय करेगी कि आगे क्या कदम उठाने हैं. इनमें आयात शुल्क बढ़ाना, सेवाओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाना या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं.

भारत-अमेरिका के बीच हुई थी व्यापार डील

भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में एक व्यापार समझौते की घोषणा की गई थी. इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ लगभग 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था. दोनों देशों ने इसे ऐतिहासिक समझौता बताया था और उम्मीद जताई थी कि इससे व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे.

हालांकि कुछ ही समय बाद अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पहले 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ घोषित किया और फिर 24 घंटे के भीतर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया.

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