नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के मानसून को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, जिससे बारिश की मात्रा में कमी आ सकती है. IMD ने बताया कि जून से सितंबर तक देशभर में वर्षा Long Period Average (LPA) के 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि "Below Normal" श्रेणी में आता है. साथ ही, अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून पर और दबाव बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर भी अधिक महसूस हो सकता है.
कम वर्षा का अनुमान
IMD के दीर्घकालिक अनुमान के अनुसार, 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार कमजोर रहेगा. जून से सितंबर के बीच पूरे देश में अनुमानित बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 92 प्रतिशत तक हो सकती है, जिसका मतलब है कि बारिश कम होगी. इस अनुमान में ±5 प्रतिशत की त्रुटि हो सकती है, यानी असल वर्षा 87 से 97 प्रतिशत के बीच हो सकती है. इसका सीधा असर कृषि, जल आपूर्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां खेती के लिए बारिश पर ज्यादा निर्भरता होती है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिमी हिस्से और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है, जो एक क्षेत्रीय असमानता को दर्शाता है.
अल नीनो का प्रभाव
2026 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव भी बड़ा हो सकता है. IMD ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच ENSO (एल नीनो-दक्षिणी दोलन) की स्थिति तटस्थ रहेगी, लेकिन जून के बाद अल नीनो जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं. अल नीनो के प्रभाव से मानसून की बारिश और भी कमजोर हो सकती है, और इसके साथ ही प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, अगर अल नीनो पूरी तरह विकसित हो जाता है, तो वर्षा में और कमी आ सकती है.
आईओडी का प्रभाव
वर्तमान में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति तटस्थ है, लेकिन मानसून के अंत तक इसके सकारात्मक होने की संभावना है. IOD का सकारात्मक होना आमतौर पर मानसून के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और बारिश को बढ़ावा दे सकता है.
Sub: Long Range Forecast for Southwest Monsoon Seasonal Rainfall 2026
— India Meteorological Department (@Indiametdept) April 13, 2026
(1) India Meteorological Department predicts below normal southwest monsoon seasonal (June to September) rainfall over the country as a whole during 2026.
(2) Quantitatively, the southwest monsoon seasonal… pic.twitter.com/c9dlF6bFAY
मई में मिलेगा और अपडेट
IMD ने यह भी बताया कि जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध और यूरेशिया में बर्फ से ढका क्षेत्र सामान्य से कम रहा है, जो मानसून के लिए एक अच्छा संकेत है. यह स्थिति भूमि और समुद्र के तापमान के बीच अंतर बढ़ाती है, जिससे मानसूनी हवाओं को मजबूती मिलती है. मौसम विभाग अगले अपडेट के लिए मई 2026 तक इंतजार करने की सलाह दे रहा है, जब और अधिक स्पष्टता मिल सकेगी.
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