Pakistani Embassy Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बिगड़ते हालात को लेकर अब विदेशों में भी विरोध की आवाजें उठने लगी हैं. अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तान दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन कर हिंसा, मौतों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर चिंता जताई.
वहीं ब्रिटेन में भी कश्मीर मूल के हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने पीओके के रावलकोट में हुई हिंसा की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई.
लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला मार्च
रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन में प्रदर्शनकारियों ने मध्य लंदन में स्पीकर्स कॉर्नर से पाकिस्तान हाई कमीशन तक मार्च निकाला. लोगों ने रावलकोट की घटनाओं को गंभीर बताते हुए वहां हुई मौतों और हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग की.
प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से पीओके के हालात पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में आम लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है.
The people of Pakistan are fed up with the government and no longer want this government to remain in power.
— S Haidar Hashmi (@HashmiHaidar313) July 31, 2026
Protests against the government are taking place across different parts of Pakistan. pic.twitter.com/yqnMmC3Quh
ब्रिटेन के सांसदों ने भी जताई चिंता
पीओके में हालात को लेकर ब्रिटेन के 50 से ज्यादा सांसदों ने विदेश मंत्री एड मिलिबैंड को पत्र लिखा है. सांसदों ने प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई, आम नागरिकों की मौत और प्रशासन की सख्ती को लेकर चिंता जताई.
इस पत्र की अगुवाई लेबर पार्टी के सांसद इमरान हुसैन ने की. उन्होंने ब्रिटिश सरकार से पूरे मामले पर नजर रखने और स्थिति को लेकर जरूरी कदम उठाने की मांग की है.
जवाबदेही की मांग तेज
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान दूतावास के बाहर जमा होकर हिंसा में मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग की. उनका कहना है कि पीओके में हुई घटनाओं की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. लोगों ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर लगी पाबंदियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में पारदर्शी जांच जरूरी है.
पीओके में क्यों शुरू हुआ विवाद?
पीओके में जारी तनाव की शुरुआत जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी है. प्रदर्शनकारी राजनीतिक अधिकारों, बेहतर प्रशासन और आर्थिक मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं. प्रदर्शनों के दौरान कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं में रुकावट की खबरें भी सामने आईं. हिंसा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है.
40 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले कुछ दिनों में पीओके में हुई हिंसा के दौरान 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं. यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने आरोप लगाया है कि रावलकोट, मीरपुर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. हालांकि अलग-अलग पक्षों की ओर से मौतों के आंकड़ों में अंतर बताया जा रहा है. इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार बढ़ रही है.
सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल
मानवाधिकार संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन रोकने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. पीओके में जारी तनाव के बीच अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस पूरे मामले पर बनी हुई है. प्रदर्शनकारी लगातार पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.
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