Cabinet Decisions: केंद्र सरकार ने देश के चार अहम क्षेत्रों कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, खेल और ऊर्जा सुरक्षा को एक साथ मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनका असर आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों तक पहुंचेगा. इन फैसलों के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक निवेश को समानांतर गति देने पर विशेष जोर रहेगा. किसानों को आर्थिक सहारा, जलाशयों से हरित ऊर्जा उत्पादन, खिलाड़ियों के लिए बेहतर ढांचा और घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने जैसे लक्ष्य इन निर्णयों के केंद्र में हैं.
पीएम किसान सम्मान निधि योजना को पांच साल का विस्तार
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है. इस योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय प्रावधान किया गया है. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है. सरकार के अनुसार अब तक किसानों को 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है. सरकार का मानना है कि इस सहायता से किसानों की खेती में निवेश क्षमता बढ़ेगी, उत्पादन बेहतर होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी.
सूर्य सरोवर योजना और खेलो इंडिया को मिला नया विस्तार
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को भी मंजूरी दी है. 5,070 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान वाली इस योजना के तहत देशभर के जलाशयों पर 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिनके साथ ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी तैयार की जाएगी. वहीं खेल क्षेत्र में संशोधित खेलो इंडिया योजना को 36,441 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ 2026-31 तक लागू रखने का फैसला किया गया है. इसके जरिए खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर खेल सुविधाएं और राष्ट्रीय खेल महासंघों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा.
'समुद्र मंथन' योजना से बढ़ेगी ऊर्जा आत्मनिर्भरता
कैबिनेट ने 84,084 करोड़ रुपये की लागत वाली 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को भी मंजूरी दी है. यह योजना वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य समुद्र में तेल एवं प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज को गति देना है. योजना के तहत गहरे समुद्र में ड्रिलिंग, उच्च गुणवत्ता वाले सीस्मिक सर्वे, सीमांत बेसिनों में वैज्ञानिक अध्ययन और आधुनिक अपतटीय उत्पादन ढांचे का विकास किया जाएगा. सरकार का अनुमान है कि इससे 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट से अधिक नए ऊर्जा भंडार मिलने की संभावना बनेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
रोजगार, तकनीक और उद्योग को भी मिलेगा नया अवसर
सरकार का मानना है कि 'समुद्र मंथन' योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और घरेलू उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. इस योजना में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग, डिजिटल प्रबंधन, क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ऑयल-गैस मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विस हब विकसित करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं. इससे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती मिलने के साथ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ने की उम्मीद है.
चार बड़े फैसलों से विकास की बहुआयामी रणनीति
केंद्र सरकार के इन फैसलों को केवल नई योजनाओं की घोषणा के रूप में नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. एक ओर किसानों की आय सुरक्षा को जारी रखा गया है, तो दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा, खेल अवसंरचना और घरेलू तेल-गैस उत्पादन को नई दिशा देने का प्रयास किया गया है. सरकार का लक्ष्य आर्थिक मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए बेहतर अवसरों को एक साथ आगे बढ़ाना है. यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में देश के विकास मॉडल को नई गति मिल सकती है.
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