LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठ नाकाम, सेना ने सीमा पर मार गिराया Made in China ड्रोन

भारतीय सेना ने शुक्रवार को खौड़ सेक्टर में सीमा के पास उड़ रहे एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते पहचान लिया और तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया.

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जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक बार फिर संदिग्ध ड्रोन गतिविधि ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. भारतीय सेना ने शुक्रवार को खौड़ सेक्टर में सीमा के पास उड़ रहे एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते पहचान लिया और तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया. शुरुआती जांच में ड्रोन पर "Made in China" लिखा मिला है, जबकि इसके साथ मेमोरी कार्ड और बैटरियां भी बरामद हुई हैं. अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह ड्रोन किस मकसद से भारतीय सीमा तक पहुंचा और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क सक्रिय था.

सीमा पर सेना की मुस्तैदी से नाकाम हुई निगरानी की कोशिश

जानकारी के अनुसार शुक्रवार तड़के पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र के मंडयाला (छम्ब) की दिशा से एक ड्रोन भारतीय सीमा की ओर बढ़ता दिखाई दिया. यह गतिविधि चकाला फॉरवर्ड क्षेत्र के पास दर्ज की गई, जो पुलिस पोस्ट पलांवाला और थाना खौड़ के अधिकार क्षेत्र में आता है. सेना के जवानों ने ड्रोन की संदिग्ध उड़ान को देखते ही सतर्कता दिखाई और कुछ ही समय में फायरिंग कर उसे जमीन पर गिरा दिया. इस त्वरित कार्रवाई से संभावित सुरक्षा खतरे को शुरुआती स्तर पर ही निष्क्रिय कर दिया गया.

ड्रोन से मिले मेमोरी कार्ड और बैटरियों ने बढ़ाया शक

ड्रोन गिराए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया. तलाशी के दौरान ड्रोन के साथ 64 जीबी का मेमोरी कार्ड और बैटरियां बरामद हुईं, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया है. अब विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ड्रोन ने उड़ान के दौरान किसी संवेदनशील सैन्य क्षेत्र की तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड किए थे या नहीं. यदि मेमोरी कार्ड में महत्वपूर्ण डेटा मिलता है तो इससे पूरे नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं.

'Made in China' लिखे ड्रोन की जांच शुरू

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बरामद ड्रोन चीन में निर्मित है. हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इसका संचालन किसके द्वारा किया जा रहा था या इसे भारतीय सीमा के पास भेजने का उद्देश्य क्या था. सेना की तकनीकी शाखा ड्रोन के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, उड़ान मार्ग और अन्य डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद इसके स्रोत और मिशन के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी.

ड्रोन बन रहे सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ड्रोन का इस्तेमाल पारंपरिक घुसपैठ के बजाय निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और हथियारों की तस्करी जैसे उद्देश्यों के लिए तेजी से बढ़ा है. छोटे आकार और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के कारण ऐसे ड्रोन को पहचानना आसान नहीं होता. यही वजह है कि भारतीय सुरक्षा बल लगातार एंटी-ड्रोन तकनीक और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं.

सेना और जांच एजेंसियां हर पहलू की कर रही हैं पड़ताल

बरामद ड्रोन को फिलहाल भारतीय सेना की अभिरक्षा में रखा गया है और विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ड्रोन किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या यह केवल सीमा की गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से भेजा गया था. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जा रहा है.

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे कई मामले

पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर और पंजाब से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर कई बार संदिग्ध ड्रोन बरामद किए जा चुके हैं. कई मामलों में ड्रोन का इस्तेमाल हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ पहुंचाने के लिए भी किया गया था. खौड़ सेक्टर की ताजा घटना ने एक बार फिर सीमा पार से हो रही ड्रोन गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हालांकि भारतीय सेना की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने इस बार भी संभावित खतरे को समय रहते विफल कर दिया. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की वास्तविक मंशा सामने आ सकेगी.

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