पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है. एक दिन पहले ही वॉशिंगटन ने इन हमलों को अस्वीकार्य करार देते हुए तेहरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी. अब अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है.
दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में हुए हवाई हमले
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के केशम द्वीप, बंदर अब्बास और सीरिक क्षेत्र में हवाई हमले किए. इन हमलों के दौरान कई जगह तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं. स्थानीय मीडिया का दावा है कि बंदर अब्बास और केशम द्वीप में लगातार विस्फोट हुए, जबकि सीरिक क्षेत्र में भी कई धमाकों से लोगों में दहशत फैल गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक सीरिक के ताहेरुई पियर इलाके में कई प्रोजेक्टाइल गिरने की जानकारी सामने आई है. हालांकि इन हमलों में हुए नुकसान या हताहतों को लेकर आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं.
अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की पुष्टि की
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है. सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह अभियान शुरू किया गया है. सेंटकॉम का कहना है कि जहाजों पर हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और यह मौजूदा युद्धविराम व्यवस्था का भी उल्लंघन माना जा रहा है. इसी वजह से अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करने का फैसला लिया.
ईरान ने अमेरिका के आरोपों को खारिज किया
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी आलोचना की है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. मंत्रालय ने पूरे घटनाक्रम के लिए अमेरिकी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा. तेहरान का कहना है कि देश अपने रणनीतिक हितों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करेगा और किसी भी खतरे का उचित जवाब देने के लिए तैयार है.
तेल कारोबार पर भी अमेरिका ने बढ़ाई सख्ती
सैन्य कार्रवाई से पहले अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान पर दबाव बढ़ाया था. होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी तेल के उत्पादन और निर्यात से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जनरल लाइसेंस रद्द कर दिया. माना जा रहा है कि इस फैसले का उद्देश्य ईरान की ऊर्जा आय पर असर डालना और उस पर अतिरिक्त दबाव बनाना है.
पश्चिम एशिया में फिर बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ा दी है. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है. ऐसे में दुनिया की नजर अब दोनों देशों की अगली रणनीति और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई है.
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