कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है. जांच एजेंसी का दावा है कि पार्टी से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जिनकी गहन जांच जरूरी है. इस कदम के बाद राज्य की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है और विपक्ष ने भी मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
चार्टर्ड विमान और हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़ा है मामला
ईडी की जांच का केंद्र कथित तौर पर चार्टर्ड विमान और हेलीकॉप्टर की खरीद से जुड़ा वित्तीय नेटवर्क है. एजेंसी का आरोप है कि टीएमसी से जुड़े खातों के जरिए हुए लेन-देन का इस्तेमाल 'एम्ब्रेयर लिगेसी 600' कॉरपोरेट विमान और 'अगस्ता वेस्टलैंड 109एसपी' हेलीकॉप्टर की खरीद प्रक्रिया में किया गया. इसी मामले में बुधवार को कोलकाता के कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई. जांच के दौरान 'केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज' और उसकी सहयोगी कंपनी 'केयरवेल एविएशन' के परिसरों को भी जांच के दायरे में लिया गया. यह कंपनी निजी चार्टर्ड विमान किराए पर उपलब्ध कराने का कारोबार करती है और एजेंसी इसके वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है.
तीन वर्षों में करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन पर उठे सवाल
ईडी के शुरुआती जांच दस्तावेजों के अनुसार अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी से जुड़े बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये 'केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' और उससे जुड़ी दूसरी इकाइयों के खातों में ट्रांसफर किए गए. इसके बाद कंपनी ने वर्ष 2023 से 2026 के बीच लगभग 82.96 करोड़ रुपये एक नई कंपनी के खाते में भेजे. जांच एजेंसी का कहना है कि इन वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों से अलग दिखाई देती है. इसी वजह से धन के स्रोत और उसके अंतिम उपयोग की गहराई से पड़ताल की जा रही है.
विमान और हेलीकॉप्टर खरीद में 112 करोड़ खर्च होने का दावा
ईडी के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुल रकम में से लगभग 112 करोड़ रुपये 'एम्ब्रेयर लिगेसी 600' विमान और 'अगस्ता वेस्टलैंड 109एसपी' हेलीकॉप्टर की खरीद में खर्च किए गए. एजेंसी का दावा है कि हेलीकॉप्टर की खरीद के दौरान विदेश से प्राप्त धनराशि का भी इस्तेमाल किया गया. जांच में यह भी कहा गया है कि इन दोनों एयरक्राफ्ट की खरीद के बाद उन्हें टीएमसी को किराए पर उपलब्ध कराया गया. इसी व्यवस्था और उससे जुड़े वित्तीय मॉडल को लेकर ईडी कई पहलुओं की जांच कर रही है.
ED को क्यों लग रहा है लेन-देन संदिग्ध?
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि विमान और हेलीकॉप्टर के उपयोग के नाम पर बड़ी मात्रा में धन का लेन-देन हुआ, जिसकी प्रकृति संदेह पैदा करती है. एजेंसी को आशंका है कि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए कई कंपनियों और वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल किया गया. ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लेन-देन का वास्तविक उद्देश्य क्या था, धन कहां से आया, किन लोगों तक पहुंचा और क्या इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है. इसी कारण एजेंसी ने संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.
बागी विधायकों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक मतभेद सामने आए. पार्टी से अलग हुए कुछ बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि पार्टी फंड में जमा धन के स्रोत की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. शिकायत के बाद मामले ने कानूनी और प्रशासनिक रूप ले लिया. इसके बाद कोलकाता पुलिस ने टीएमसी के तीन बैंक खातों से होने वाले वित्तीय लेन-देन और निकासी पर रोक लगा दी थी. इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में भी विचाराधीन है.
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