इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित संदिग्ध सामग्री (CSAM) सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने Meta के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा. साथ ही निर्देश दिया गया कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट को तत्काल हटाया जाए, जो बाल यौन शोषण से जुड़े हों या नियमों का उल्लंघन करते हों.
आईटी मंत्री ने अधिकारियों को किया तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Meta के अधिकारियों को भी तलब करने के निर्देश दिए. सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी. सरकार की इस कार्रवाई के बाद Meta ने भी मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए अपनी नीतियों और उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की.
Meta ने जताया खेद
Meta ने अपने बयान में कहा कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अपराध बेहद गंभीर और अस्वीकार्य हैं. कंपनी ने दोहराया कि इस तरह की गतिविधियों के प्रति उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है और ऐसे मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई की जाती है. कंपनी के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान भारत में लगभग 1.60 लाख संदिग्ध इंस्टाग्राम अकाउंट्स को बंद किया गया है, जिनका संबंध संभावित रूप से नियमों के उल्लंघन से था.
एआई तकनीक से होती है संदिग्ध गतिविधियों की पहचान
Meta का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम की मदद से संदिग्ध लिंक, विज्ञापनों और अकाउंट्स की पहचान करता है. कंपनी के मुताबिक यही तकनीक संभावित उल्लंघनों का स्वतः पता लगाती है और आवश्यक कार्रवाई शुरू करती है. Meta ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 के दौरान इसी तकनीक की सहायता से दुनिया भर में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 40 लाख से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई थी.
विज्ञापन, अकाउंट और लिंक पर भी हुई कार्रवाई
कंपनी के अनुसार केवल अकाउंट बंद करना ही नहीं, बल्कि नीति का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों को हटाने, संबंधित यूआरएल ब्लॉक करने और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं. Meta का दावा है कि उसके कई एनफोर्समेंट सिस्टम ने उपयोगकर्ताओं की शिकायत आने से पहले ही बड़ी संख्या में नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट और अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी.
जांच में सामने आए नए सवाल
हालांकि इस पूरे मामले के बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित श्रेणी के कुछ विज्ञापन अब भी दिखाई दे रहे थे. इससे यह सवाल भी उठ रहे हैं कि कंटेंट मॉडरेशन और नियमों के पालन की प्रक्रिया हर मामले में समान रूप से प्रभावी है या नहीं.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी बहस
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल कंटेंट मॉडरेशन को लेकर बहस तेज हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली उपयोगी है, लेकिन इसके साथ मानवीय समीक्षा और लगातार निगरानी भी जरूरी है, ताकि किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को समय रहते हटाया जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों, के लिए सुरक्षित बने रहें.