करूर भगदड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश, 3 सदस्यीय कमेटी करेगी निगरानी, जानें मामला

तमिलनाडु के करूर जिले में सितंबर 2025 में हुई भयावह भगदड़ की घटना, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई और 100 से अधिक घायल हुए, अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की निगरानी में जांचेगी.

Supreme Court orders CBI probe into Karur stampede
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: तमिलनाडु के करूर जिले में सितंबर 2025 में हुई भयावह भगदड़ की घटना, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई और 100 से अधिक घायल हुए, अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की निगरानी में जांचेगी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 13 अक्टूबर 2025 को इस मामले की सुनवाई करते हुए CBI जांच का आदेश जारी किया. साथ ही एक 3 सदस्यीय निगरानी समिति भी गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी करेंगे.

यह फैसला अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगम विरुधु कझगम (TVK) की रैली के दौरान हुए हादसे के बाद लिया गया है. इस घटना ने न केवल तमिलनाडु की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं और न्यायपालिका की भूमिका पर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं.

क्या हुआ था करूर में?

27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर जिले में TVK द्वारा आयोजित एक जनसभा और राहत वितरण कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी. आयोजन स्थल पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था बेहद कमजोर थी.

इसी दौरान अचानक भगदड़ मच गई, जिससे 41 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से कई महिलाएं और बुजुर्ग थे. इसके अतिरिक्त 100 से अधिक लोग घायल हुए, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चला.

स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर लापरवाही, भीड़ नियंत्रण में विफलता, और रैली को अनुमति देने में पक्षपात का आरोप लगा.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या कहता है?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने CBI जांच का आदेश देते हुए कहा कि जांच की निगरानी एक 3 सदस्यीय समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज अजय रस्तोगी करेंगे.

इस समिति में शामिल होंगे:

  • दो IPS अधिकारी, जो तमिलनाडु कैडर के होंगे लेकिन राज्य के निवासी नहीं होंगे.
  • ये दोनों अधिकारी IGP रैंक से नीचे नहीं होने चाहिए.
  • CBI को आदेश दिया गया है कि वे हर महीने जांच की स्थिति पर रिपोर्ट इस कमेटी को सौंपें.

हाईकोर्ट की भूमिका पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि:

जब यह मामला पहले से ही मदुरै बेंच के अधीन था, तो मद्रास हाईकोर्ट के एकल पीठ द्वारा बिना चीफ जस्टिस की अनुमति के इस पर सुनवाई करना न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है.

यह भी देखा गया कि SOP से जुड़ी रिट याचिका को आपराधिक याचिका (Writ Petition Criminal) के तौर पर लिस्ट कर दिया गया, जो न्यायिक नियमों के अनुसार गलत है.

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है कि यह याचिका किस प्रक्रिया के तहत लिस्ट की गई.

CBI को क्या करना होगा?

  • CBI को मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और निष्कलंक जांच करनी होगी.
  • जांच के दौरान हर महीने निगरानी समिति को रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा.
  • समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच प्रभावित न हो और किसी भी पक्ष का पक्षपात न हो.

मुझसे बदला लें, मेरे कार्यकर्ताओं से नहीं- विजय

इस हादसे के बाद अभिनेता और TVK प्रमुख थलपति विजय ने 30 सितंबर को एक वीडियो बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु सरकार और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर गंभीर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा, "अगर आप मुझसे नाराज़ हैं तो मुझसे बदला लें. मेरे घर या ऑफिस आइए. लेकिन मेरी पार्टी के पदाधिकारियों को मत सताइए. उन्हें गिरफ्तार करना या प्रताड़ित करना गलत है. हमने कुछ गलत नहीं किया."

विजय का यह बयान उस वक्त आया जब TVK के कई पदाधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था.

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