रूस और यूक्रेन के बीच जंग ने एक नया मोड़ ले लिया, जब शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला कर डाला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने एक ही रात में 537 हवाई हमले किए – जिनमें 477 ड्रोन और डिकॉय शामिल थे, साथ ही 60 मिसाइलें दागी गईं. इस हमले में यूक्रेन का एक F-16 फाइटर जेट भी क्रैश हो गया.
इस ऑपरेशन के दौरान रूस ने अपने पुराने लेकिन घातक Tu-95 बॉम्बर का इस्तेमाल किया, जो मरमंस्क क्षेत्र के ओलेन्या एयरबेस से उड़ान भरकर यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में मिसाइलें बरसाने निकला. रूस ने इस हमले से यह दिखा दिया कि भले ही उसके पास स्टील्थ टेक्नोलॉजी न हो, लेकिन उसकी पारंपरिक ताकत अभी भी कम नहीं आंकी जा सकती.
इसी बीच अमेरिका का भी नाम चर्चा में आया, जब उसने कुछ दिन पहले ही ईरान के गुप्त ठिकानों पर बंकर-बस्टर बम गिराए – वो भी अपने अल्ट्रा-सीक्रेट B-2 स्पिरिट बॉम्बर से, जिसे रडार पर पकड़ना लगभग नामुमकिन है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या रूस का Tu-95, अमेरिका के B-2 स्पिरिट के सामने कोई मुकाबला कर सकता है? आइए दोनों की ताकत और कमजोरियों को समझते हैं.
Tu-95 'Bear' बॉम्बर: पुराना लेकिन भरोसेमंद
रूस का Tu-95 बॉम्बर 1950 के दशक में बना था, लेकिन आज भी यह रूस की एयर स्ट्राइक कैपेबिलिटी में अहम रोल निभा रहा है. इसे नाटो "Bear" के नाम से जानता है.
लेकिन इसकी कुछ कमजोरियां भी हैं:
अमेरिका का B-2 स्पिरिट बॉम्बर आज के समय का सबसे उन्नत और स्टील्थ बॉम्बर माना जाता है. यह खासतौर पर ऐसे मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है जहां दुश्मन को भनक तक न लगे.
लेकिन B-2 की अपनी कुछ चुनौतियां हैं:
तो आखिर कौन किस पर भारी है?
अगर सीधे तुलना की जाए तो Tu-95 और B-2 स्पिरिट का कोई सीधा मुकाबला नहीं बनता. Tu-95 लंबी दूरी से मिसाइल दागने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन यह दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला करने के लिए सुरक्षित नहीं है. दूसरी ओर, B-2 स्पिरिट एक ऐसा घातक हथियार है जो चुपचाप दुश्मन के सबसे गहरे बंकरों को भी तबाह कर सकता है – बिना रडार की पकड़ में आए.