Moscow: कभी-कभी एक कविता इतना शोर मचा देती है कि सत्ता तक को हिला देती है. रूस की 19 वर्षीय युवती दार्या कोज़ीरेवा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है — एक शांतिपूर्ण विरोध, कुछ पंक्तियां, और उसके बदले एक कठोर सज़ा.
सेंट पीटर्सबर्ग की अदालत ने दार्या को 2 साल 8 महीने की जबरन श्रम की सजा सुनाई है. उसका ‘अपराध’ इतना भर था कि उसने एक यूक्रेनी कवि की युद्ध-विरोधी पंक्तियां एक स्मारक पर चिपका दी थीं. यह एक प्रतीकात्मक विरोध था — न कोई हिंसा, न कोई अपमानजनक भाषा. बस एक विचार, एक अहिंसक स्वर.
कविता कुछ इस प्रकार से था-
‘मुझे दफनाओ, फिर उठो/ अपनी भारी जंजीरें तोड़ो/ और तानाशाहों के खून से/ अपनी आज़ादी को सींचो’
2024 के एक रेडियो इंटरव्यू में भी दार्या ने युद्ध को "भयानक" और "अपराधपूर्ण" बताया था. यह कहने की हिम्मत करने पर उन्हें पहले गिरफ्तार किया गया, फिर छोड़ा गया, लेकिन बाद में उनके खिलाफ सेना को बदनाम करने का दूसरा केस दर्ज किया गया.
शब्दों की सजा: समाज से बहिष्करण और क्रूर श्रम
रूस में ऐसे मामलों में न केवल जेल की सजा दी जाती है, बल्कि दोषियों को समाज से अलग करके दूरदराज इलाकों में अत्यंत कठोर परिस्थितियों में श्रम के लिए भेजा जाता है. दार्या को भी यही सजा मिली है — समाज से काट कर, एकांत में डालने की सजा.
"मैंने बस एक कविता चिपकाई थी"
अदालत में दार्या की आवाज़ कांपी नहीं, उसने साफ़ कहा — “मैंने कोई अपराध नहीं किया. मेरी अंतरात्मा साफ है.” मगर इन शब्दों से सत्ता की दीवारें नहीं हिलीं, सजा सुना दी गई.
मानवाधिकार संगठनों की आलोचना
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस फैसले को “शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने की एक और डरावनी मिसाल” बताया है और दार्या सहित सभी ‘युद्ध-सेंसरशिप कानूनों’ के तहत बंद कैदियों की तत्काल रिहाई की मांग की है.
रूसी मानवाधिकार समूह ओवीडी-इन्फो के अनुसार, 2022 से अब तक रूस में 1,500 से ज्यादा लोग सिर्फ राजनीतिक असहमति के चलते जेल में डाले जा चुके हैं. दार्या इस सिस्टम के खिलाफ खड़े होते युवा चेहरों में से एक हैं.
एक लड़की, लाखों की आवाज़
दार्या कोज़ीरेवा अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक प्रतीक बन चुकी हैं — उन युवाओं का प्रतीक जो डर के साए में नहीं, अंतरात्मा की आवाज़ में जीते हैं. उनकी चुप्पी में भी एक पुकार है — न्याय, आज़ादी और इंसानियत की.
ये भी पढ़ेंः कश्मीर पर फिर उल्टा बोल गया पाकिस्तान, भारत के खिलाफ उगला जहर; कहा- PoK पर दावा छोड़ दो