Bastar Naxal End: 15 अगस्त 2025, देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे थे, तो उनके शब्दों में सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि एक बदलते भारत की कहानी थी. एक ऐसा भारत जो न सिर्फ अपनी जड़ों से जुड़ा है, बल्कि अपने भविष्य को भी मजबूती से गढ़ रहा है.
"यह पर्व 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक है," प्रधानमंत्री ने कहा. उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब आंबेडकर, नेहरू, सरदार पटेल और अन्य महान विभूतियों को श्रद्धा से याद किया, जिनके विचार आज भी भारत को दिशा दे रहे हैं.
नक्सलवाद से विकास तक का बदलाव
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में एक ऐसी उपलब्धि की ओर इशारा किया, जिस पर हर भारतीय गर्व कर सकता है, माओवादी हिंसा से पीड़ित जिलों में बदलाव की कहानी. उन्होंने कहा, “जो क्षेत्र कभी रेड कॉरिडोर कहे जाते थे, आज वहां विकास का ग्रीन कॉरिडोर बन रहा है.”
यह कोई साधारण परिवर्तन नहीं है. कभी जहां 125 जिले नक्सलवाद की चपेट में थे, अब वह संख्या घटकर सिर्फ 20 जिलों तक सीमित रह गई है. बस्तर और कोंडागांव, जो कभी माओवादी गतिविधियों का केंद्र माने जाते थे, आज खेल, शिक्षा और विकास में आगे बढ़ रहे हैं.
कैसे हुआ यह परिवर्तन?
प्रभावी सुरक्षा अभियान: बीते वर्षों में सुरक्षाबलों और प्रशासन की संयुक्त रणनीति ने माओवादी नेटवर्क को कमजोर किया.
लोकतंत्र की जीत: 2023 के चुनावों में बस्तर में 84.6% और कोंडागांव में 81.7% मतदान हुआ — यह बताता है कि लोग अब लोकतंत्र और विकास के साथ हैं.
विकास की पहुंच: पहले जहां सरकारी योजनाएं नहीं पहुंचती थीं, अब वही क्षेत्र प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना जैसी स्कीम्स से लाभान्वित हो रहे हैं.
युवाओं का रुख बदला: कभी हथियार उठाने वाले युवाओं का रुख अब खेल मैदानों और रोज़गार की ओर हो रहा है.
बस्तर: जो कभी लाल था, आज हरा है
बस्तर को वामपंथी उग्रवाद की छाया से बाहर लाना एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन आज यह इलाका संविधान, कानून और विकास की रौशनी से रोशन है. प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि "वह क्षेत्र जहां कभी लाल झंडे लहराते थे, वहां आज तिरंगा फहरा रहा है."
यह केवल भाषण नहीं, भविष्य का भरोसा है
पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में जो बातें सामने आईं, वे न केवल सरकार की उपलब्धियां हैं, बल्कि एक संदेश भी है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो हर अंधेरा मिटाया जा सकता है. रेड कॉरिडोर का हर इलाका अब संभावनाओं की ज़मीन बन रहा है. और यह परिवर्तन ही आज के भारत की असली तस्वीर है, आत्मनिर्भर, सुरक्षित और तेज़ी से आगे बढ़ता भारत.
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