K9 Vajra Howitzer: भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. चीन और पाकिस्तान से मिल रही चुनौतियों को देखते हुए सेना 300 से अधिक K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है. इस प्रस्ताव की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद इन तोपों के निर्माण का काम लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को दिया जा सकता है.
भारत में ही बन रही हैं K-9 वज्र तोपें
K-9 वज्र तोपों का निर्माण भारत में किया जा रहा है. इसके लिए एलएंडटी दक्षिण कोरिया की रक्षा कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के साथ तकनीकी साझेदारी में काम कर रही है. इस परियोजना को 'मेक इन इंडिया' और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
500 के पार पहुंच जाएगी संख्या
अगर नई खरीद को मंजूरी मिल जाती है, तो भारतीय सेना के पास मौजूद और ऑर्डर की गई K-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से ज्यादा हो जाएगी. साल 2017 में भारत ने पहली बार 100 K-9 वज्र तोपों के लिए करीब 4,500 करोड़ रुपये का सौदा किया था.
इनकी डिलीवरी 2021 तक पूरी हो गई थी. शुरुआत में इन्हें राजस्थान और गुजरात के रेगिस्तानी इलाकों में तैनात किया गया था. इसके बाद दिसंबर 2023 में सेना ने 100 और तोपों के लिए करीब 7,600 करोड़ रुपये का दूसरा समझौता किया. अब 300 अतिरिक्त तोपों की योजना सेना की ताकत को और बढ़ाने वाली मानी जा रही है.
रेगिस्तान से लेकर लद्दाख तक कारगर
K-9 वज्र एक 155 मिमी और 52-कैलिबर की आधुनिक हॉवित्जर तोप है. यह 40 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. पहले इसे मुख्य रूप से रेगिस्तानी इलाकों में इस्तेमाल के लिए तैयार माना जाता था, लेकिन बाद में इसका उपयोग पहाड़ी क्षेत्रों में भी सफल साबित हुआ.
लद्दाख में बेहद ठंडे मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में किए गए परीक्षणों में इस तोप ने शानदार प्रदर्शन किया. इसके बाद सेना ने इसे चीन सीमा के पास भी तैनात करना शुरू किया.
'शूट एंड स्कूट' क्षमता बनाती है खास
K-9 वज्र की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'शूट एंड स्कूट' क्षमता है. इसका मतलब है कि यह तोप तेजी से गोले दागने के बाद तुरंत अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है.
जवानों को मिलती है बेहतर सुरक्षा
यह तोप पूरी तरह बख्तरबंद है, जिससे इसके अंदर मौजूद सैनिकों को बेहतर सुरक्षा मिलती है. दुश्मन की गोलीबारी और विस्फोट के दौरान भी यह अपने क्रू की रक्षा करने में सक्षम है. इसके अलावा इसकी तेज गति और बेहतर मोबिलिटी की वजह से इसे टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों के साथ आसानी से युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सकता है.
सेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा
भारतीय सेना का मानना है कि K-9 वज्र तोपों की बढ़ती संख्या से उसकी आर्टिलरी क्षमता काफी मजबूत होगी. इससे चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सेना की तैयारी और जवाबी क्षमता बेहतर होगी. आने वाले समय में यह सौदा भारतीय सेना के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक साबित हो सकता है.
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