PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर फर्जी खबरें और भ्रामक वीडियो फैलाकर अपनी आंतरिक विफलताओं तथा मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने कहा कि PoK से पुलिस और सुरक्षा बलों की कथित बर्बर कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. इन घटनाओं में कई लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की सूचना है. भारत ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों और उसके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराएगा.
प्रतिबंध के बाद भड़का विरोध
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए. JAAC क्षेत्र का एक प्रमुख नागरिक संगठन माना जाता है, जो लंबे समय से आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर आंदोलन चला रहा है.
प्रतिबंध के बाद विभिन्न इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं. रिपोर्टों के अनुसार, इन घटनाओं में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 200 लोग घायल हुए हैं.
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— Sidhant Sibal (@sidhant) June 9, 2026
India reacts to unrest in Pakistan occupied Kashmir; Points to human rights abuses in the occupied region including police brutality.
MEA spox Randhir Jaiswal pic.twitter.com/1xNe1myMZW
मोर्चरी के बाहर जमा हुए थे प्रदर्शनकारी
स्थानीय पुलिस के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब JAAC से जुड़े लोग एक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्र हुए. वहां संगठन के एक सदस्य का शव रखा गया था, जिसकी मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी.
पुलिस का कहना है कि जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने का प्रयास किया तो स्थिति बिगड़ गई. अधिकारियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ गया.
क्षेत्र में बढ़ा तनाव
PoK में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के चलते सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. कई इलाकों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है और हालात पर नजर रखी जा रही है. वहीं, प्रदर्शनकारी स्थानीय अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक समस्याओं को लेकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.
इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जबकि भारत ने एक बार फिर वहां मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है.
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