Sushmita Dev Resigned: तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. सुष्मिता देव साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं. पार्टी में आने के बाद उन्हें अहम जिम्मेदारियां मिलीं और बाद में राज्यसभा भेजा गया.
कांग्रेस से TMC तक का सफर
सुष्मिता देव लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़ी रहीं. वह महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुकी हैं. असम के सिलचर से वह लोकसभा सांसद भी चुनी गई थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का दामन थाम लिया. इसके बाद पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया.
Another setback for #TMC supremo #MamataBanerjee as party Rajya Sabha MP Sushmita Dev resigns from the post of MP.
— Pooja Mehta (@pooja_news) June 10, 2026
Met Assam CM Himanta Biswa Sarma a short while ago. pic.twitter.com/mtSm4gXIDz
TMC में बढ़ रही है अंदरूनी खींचतान
सुष्मिता देव से पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं. लगातार हो रहे इस्तीफों को पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. पार्टी के कुछ नेता खुलकर नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. वहीं कई विधायक और सांसद भी अलग राय रखते नजर आ रहे हैं.
बागी गुट के दावों से बढ़ी चिंता
टीएमसी सांसद काकोली घोष ने हाल ही में दावा किया था कि पार्टी के करीब 20 सांसद एनडीए के साथ जाने की इच्छा रखते हैं. इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र सौंपे जाने की बात कही गई है. हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अब तक ऐसे किसी समूह की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है.
पार्टी कार्यालय को लेकर भी विवाद
इसी बीच टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय खाली करने की मांग की है. बताया जा रहा है कि वह भी पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के समूह से जुड़े हुए हैं. इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और उजागर कर दिया है.
कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर साधा निशाना
टीएमसी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागी नेताओं पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता पार्टी से सहमत नहीं है तो उसे पद छोड़ देना चाहिए.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर बागी गुट के पास 20 सांसदों का समर्थन है, तो उनके नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं. उनके मुताबिक केवल दावे करने से बात नहीं बनेगी, समर्थन के सबूत भी सामने आने चाहिए.
चुनावी हार के बाद बढ़ी मुश्किलें
हालिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है. चुनाव परिणाम आने के बाद कई नेताओं ने अलग रुख अपनाया है और पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं. ऐसे में ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट रखना और नेताओं की नाराजगी को दूर करना है.
ये भी पढ़ें- अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने किया भीषण एयरस्ट्राइक, कायराना हमले में बच्चों और महिलाओं समेत 13 लोगों की मौत