इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत की नीतियों और क्षेत्रीय दृष्टिकोण को लेकर एक बार फिर कड़ा बयान दिया है. इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज में आयोजित एक कार्यक्रम में डार ने कहा कि भारत "आक्रामक कूटनीति" के जरिए क्षेत्र पर अपना प्रभाव थोपने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने भारत से अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और पाकिस्तान के साथ संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की.
इशाक डार ने कहा, "भारत स्वयं ही आरोप लगाता है, बयान देता है और निष्कर्ष निकाल लेता है. यह एकतरफा दृष्टिकोण क्षेत्रीय शांति के लिए बाधक है."
सिंधु जल संधि और ऑपरेशन सिंदूर
इशाक डार ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने की रिपोर्ट्स को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि भारत की यह नीति जल को "रणनीतिक हथियार" की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश के समान है, जिसे पाकिस्तान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा.
डार ने कहा कि जल विवाद को सुलझाने के लिए स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) के हस्तक्षेप की आवश्यकता है, और भारत को अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से उठाए गए आपत्ति पूर्णतया वैध हैं और उनका अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन भी है.
कश्मीर मुद्दे को फिर से उठाया
विदेश मंत्री डार ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़ते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शांति तभी संभव है जब इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान खोजा जाए. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को रचनात्मक संवाद के लिए प्रयास करना चाहिए.
डार ने कहा, "शांति और स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवाधिकारों के तहत सुलझाया जाए."
भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों पर लक्षित हवाई हमले किए. इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि सहित कई अहम द्विपक्षीय व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार शुरू कर दिया.
इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान की ओर से कई नेताओं ने बयान जारी किए, जिनमें भारत की नीतियों की आलोचना की गई. इशाक डार का बयान इस सिलसिले की कड़ी है, जो भारत की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय रणनीति के विरुद्ध पाकिस्तान की चिंता को दर्शाता है.
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