इंडियन नेवी के रडार पर हैं पाकिस्तान की हंगोर पनडुब्बियां, कहर बरपाएंगे समुद्र में तैनात ये खतरनाक युद्धपोत

चीन ने हाल ही में पाकिस्तान को तीसरी हंगोर-श्रेणी की पनडुब्बी सौंपी है. यह सौंपा जाना उस बड़े सौदे का हिस्सा है जिसके तहत पाकिस्तान को कुल आठ पनडुब्बियां मिलनी हैं. इन पनडुब्बियों से पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत को नया बल मिला है, खासकर उस समय जब चीन भी हिंद महासागर में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.

Pakistan s Hangor class submarines under Indian Navy radar from the word go
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नई दिल्ली: चीन ने हाल ही में पाकिस्तान को तीसरी हंगोर-श्रेणी की पनडुब्बी सौंपी है. यह सौंपा जाना उस बड़े सौदे का हिस्सा है जिसके तहत पाकिस्तान को कुल आठ पनडुब्बियां मिलनी हैं. इन पनडुब्बियों से पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत को नया बल मिला है, खासकर उस समय जब चीन भी हिंद महासागर में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. एक ऐसा क्षेत्र जिसे भारत अपनी रणनीतिक सीमाओं के भीतर मानता है.

इस पनडुब्बी का जलावतरण चीन के वुहान शहर में हुआ. इससे पहले दूसरी पनडुब्बी मार्च 2025 में पाकिस्तान को सौंपी गई थी. चीन ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान को चार अत्याधुनिक युद्धपोत (फ्रिगेट) भी दिए हैं और ग्वादर बंदरगाह के विकास में सहयोग किया है.

हंगोर पनडुब्बी क्या है और क्यों है ख़ास?

हंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियां चीन की टाइप 039बी युआन-क्लास की निर्यात संस्करण हैं. इन्हें पानी के नीचे गुप्त रहने, लंबी दूरी तक काम करने और तेज़ी से मूव करने के लिए डिजाइन किया गया है. ये AIP (एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन) तकनीक पर आधारित हैं जिससे इन्हें लंबे समय तक सतह पर आए बिना पानी के अंदर रहने की क्षमता मिलती है. 2015 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा के दौरान इन पनडुब्बियों का सौदा हुआ था. समझौते के तहत चार पनडुब्बियाँ चीन में और बाकी चार कराची में तकनीक हस्तांतरण (ToT) के जरिए बननी हैं.

क्या यह भारत के लिए चुनौती है?

जहां पाकिस्तान इन पनडुब्बियों से अपनी नौसैनिक शक्ति बढ़ा रहा है, वहीं भारत की तैयारियां पहले से ही गहराई में चल रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियाँ कुछ मामलों में पुरानी तकनीक पर आधारित हैं और भारत की आधुनिक पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) क्षमताओं के सामने कमजोर पड़ सकती हैं.

भारत ने सतह से लेकर समुद्र की गहराई तक बहुस्तरीय ASW नेटवर्क तैयार किया है, जिसमें विमान, जहाज, हेलीकॉप्टर और पानी के नीचे की निगरानी प्रणालियाँ शामिल हैं. ये सभी संभावित दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान करने, ट्रैक करने और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं.

भारत की जवाबी ताकत

भारतीय नौसेना ने हाल ही में INS अर्नाला को अपनी सेवा में शामिल किया है. यह एक शैलो वाटर क्राफ्ट (SWC) है जो उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने में माहिर है. इसके अलावा, भारत के पास स्वदेशी सोनार सिस्टम, ध्वनिक अवरोध, और ASW कोरवेट जैसे कामोर्टा-श्रेणी के युद्धपोत भी हैं. P-8I पोसाइडन जैसे लंबी दूरी के टोही विमान भी भारत के पास हैं, जो सोनोबॉय और चुंबकीय विसंगति डिटेक्टर जैसी तकनीकों के जरिए समुद्र में निगरानी रखते हैं. MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर डिपिंग सोनार और टॉरपीडो से लैस हैं, जिससे वे जल्दी से पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं.

UUV तकनीक: बिना पायलट के निगरानी का नया तरीका

भारत अब मानवरहित अंडरवाटर व्हीकल (UUV) तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे बिना किसी चालक के पनडुब्बियों पर नजर रखना और हमला करना संभव हो सकेगा. इससे समुद्र की निगरानी और तेज़ व सटीक हो जाएगी.

क्या हंगोर पनडुब्बियां भारत के लिए खतरा बन सकती हैं?

पाकिस्तान के पास पहले से अगोस्टा 90B जैसी AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां हैं जो किसी भी देश के लिए चुनौती हो सकती हैं. लेकिन भारतीय नौसेना ने पहले भी पाकिस्तानी पनडुब्बियों को ट्रैक करने और उन्हें पाकिस्तान के अपने जलक्षेत्र में खोजने की क्षमता का प्रदर्शन किया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत सिर्फ खतरे को पहचान ही नहीं रहा, बल्कि सक्रिय रणनीतियों के साथ जवाब भी दे रहा है.

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