पाकिस्तान का नया ड्रामा! दुनिया को फिर दिखाया ‘एक्शन’ का झांसा, मसूद अजहर पर निकाला ‘वारंट’

Masood Azhar: पाकिस्तान ने आतंकी मसूद अजहर पर इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी है. वहीं, FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 17 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं.

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Masood Azhar: पाकिस्तान एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया की आंखों में धूल झोंकता नजर आ रहा है. जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर पर पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (FIA) ने इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी है. FIA की अपडेटेड मोस्ट वांटेड आतंकियों की रेड बुक में मसूद अजहर का नाम शामिल है. दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान पहले भी उसके खिलाफ कार्रवाई का दिखावा कर चुका है, लेकिन अब पांच साल बाद इनाम की रकम बढ़ाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

पांच साल बाद इनाम में 20 लाख की बढ़ोतरी

पाकिस्तान ने साल 2021 में दावा किया था कि मसूद अजहर उसके देश से गायब होकर अफगानिस्तान चला गया है. इसी दौरान FIA की सूची में उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था. अब करीब पांच साल बाद इस रकम को बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया गया है. आरोप है कि पाकिस्तान इस तरह की कार्रवाई के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाने की कोशिश करता रहा है कि वह आतंकियों के खिलाफ कदम उठा रहा है.

मसूद अजहर के ठिकाने को लेकर बड़ा दावा

पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है. हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों की टेक्निकल एनालिसिस के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पिछले करीब छह महीनों से मसूद अजहर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में छिपा हुआ है. ऐसे में FIA की रेड बुक में उसका नाम और इनाम बढ़ाए जाने की कार्रवाई पाकिस्तान के दावों पर सवाल खड़े करती है.

26/11 के 19 आतंकियों के नाम भी रेड बुक में

FIA की नई सूची में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं. इनमें से 17 आतंकियों की तस्वीर के साथ 26/11 हमले में उनकी भूमिका का जिक्र किया गया है. हालांकि, दो आतंकियों के मामले में पाकिस्तान ने तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और हमले में उनकी भूमिका का विवरण हटा दिया है और सिर्फ उनके नाम सूची में रखे हैं.

तुर्बत के मोहम्मद खान का नाम भी इस सूची में मौजूद है. उस पर आरोप है कि उसने आतंकियों को मुंबई पहुंचाने के लिए 'अल-हुसैनी' नाव उपलब्ध कराई थी. इसी तरह बहावलनगर के रहने वाले लश्कर-ए-तैयबा आतंकी अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में है. लेकिन दोनों के फोटो और आतंकी संगठन से जुड़े होने की जानकारी नई सूची से हटा दी गई है. जबकि 2021 की FIA रेड बुक में इनका विस्तृत विवरण मौजूद था.

दो नावों से मुंबई पहुंचाए गए थे आतंकी

FIA की मौजूदा सूची में उन 11 आतंकियों के नाम भी हैं, जिन पर 26/11 हमले के आतंकियों को 'अल-हुसैनी' और 'अल-फौज' नावों के जरिए समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में मदद करने का आरोप है. इनमें मुल्तान के मोहम्मद अमजद खान, बहावलपुर के शाहिद गफूर, साहीवाल के मोहम्मद उस्मान, लाहौर के अतीक उर रहमान, हाफिजाबाद के रियाज अहमद, गुजरांवाला के मोहम्मद मुश्ताक, डेरा गाजी खान के मोहम्मद नईम, कराची के अब्दुल शकूर, मुल्तान के मोहम्मद साबिर सल्फी, लोधरान के मोहम्मद उस्मान और रहीम यार खान के शकील अहमद के नाम शामिल हैं.

हमले के लिए पैसे देने वाले 6 आरोपी भी सूची में

रेड बुक में उन छह आरोपियों के नाम भी दर्ज हैं, जिन पर 26/11 हमले के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का आरोप है. इनमें फैसलाबाद के मोहम्मद इफ्तिखार अली पर आतंकियों और उनके आकाओं के बीच बातचीत के लिए VOIP कनेक्शन पर 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप है.

इसके अलावा रावलपिंडी के मोहम्मद जिया पर 80 हजार रुपये, खानेवाल के मोहम्मद अब्बास नासिर पर 2 लाख 53 हजार रुपये, कसूर के जावेद इकबाल पर 1 लाख 86 हजार 430 रुपये, मंडी बहाउद्दीन के मुख्तार अहमद पर 2 लाख 98 हजार 47 रुपये और बटग्राम के अहमद सईद पर 21 लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है.

18 साल से फरार, फिर भी पाकिस्तान में होने का दावा

FIA के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े ये 17 आरोपी पिछले 18 साल से फरार हैं. हालांकि, भारतीय खुफिया विभाग के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ये सभी पाकिस्तान में ही मौजूद हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर ये आरोपी पाकिस्तान में हैं तो उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करके क्या पाकिस्तान महज कार्रवाई का दिखावा कर रहा है?

पांच साल में 35 फीसदी बढ़ी मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या

पाकिस्तान की नई रेड बुक में आतंकियों की बढ़ती संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है. साल 2021 में FIA की रेड बुक में पाकिस्तान के 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम दर्ज थे. अब पांच साल बाद यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है. यानी इस अवधि में पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड सूची में करीब 35 फीसदी का इजाफा हुआ है. इससे आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कथित कार्रवाई और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर सवाल और गहरे हो जाते हैं.

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