पाकिस्तान में अजब खेल! 'लूजर' बनेगा PoK का प्रधानमंत्री, शहबाज-मुनीर के फैसले से शुरू हुआ बवाल

PoK Election: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आम चुनाव के बाद अब प्रधानमंत्री पद को लेकर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अंदर ही खींचतान शुरू हो गई है. चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पीएमएल-एन ने बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है.

Pakistan Iftikhar Gilani become PM PoK uproar erupts over decision Shehbaz Munir
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PoK Election: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आम चुनाव के बाद अब प्रधानमंत्री पद को लेकर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अंदर ही खींचतान शुरू हो गई है. चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पीएमएल-एन ने बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है. लेकिन गिलानी का नाम सामने आते ही पार्टी के अंदर विरोध के सुर उठने लगे हैं और सोशल मीडिया पर भी सवाल किए जा रहे हैं.

विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि इफ्तिखार गिलानी हालिया आम चुनाव में अपनी सीट हार गए थे. इससे पहले 2021 के चुनाव में भी उन्हें जीत नहीं मिली थी. इसके बावजूद पीएमएल-एन ने उन्हें तकनीकी विशेषज्ञों के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा में भेजा. अब पार्टी अध्यक्ष नवाज शरीफ ने उन्हीं गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया है.

चुनाव हारने के बाद आरक्षित सीट से पहुंचे विधानसभा, अब PM की रेस में

इफ्तिखार गिलानी का विधानसभा तक पहुंचने का रास्ता सीधे चुनाव से नहीं, बल्कि आरक्षित सीट से होकर आया है. यही बात अब उनके विरोध की सबसे बड़ी वजह बन गई है. पार्टी के अंदर सवाल उठ रहे हैं कि जब जनता ने उन्हें सीधे चुनाव में जीत नहीं दिलाई तो उन्हें प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है?

हालांकि, आरक्षित सीट से विधानसभा पहुंचने वाले किसी नेता का प्रधानमंत्री बनना पहली बार नहीं है. इससे पहले मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के नेता सरदार अब्दुल कय्यूम खान भी मौलवियों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने 1991 से 1996 तक पीओके के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया था.

शाह गुलाम कादिर भी थे PM पद की दौड़ में

गिलानी के नाम को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पीएमएल-एन के पीओके अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर का नाम भी प्रधानमंत्री पद के लिए चर्चा में था. बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में इफ्तिखार गिलानी और शाह गुलाम कादिर, दोनों के नामों पर चर्चा हुई थी.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, बैठक में तय हुआ था कि दोनों में से किसी एक को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष नवाज शरीफ पर छोड़ा गया था.

नवाज शरीफ ने गिलानी को क्यों चुना?

पार्टी के कुछ नेताओं का आरोप है कि नवाज शरीफ ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इफ्तिखार गिलानी के नाम को आगे कर दिया. वहीं, शाह गुलाम कादिर को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी उन्हें मिलेगी.

पीएमएल-एन के अंदर नाराजगी सिर्फ शाह गुलाम कादिर तक ही सीमित नहीं है. पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर भी इस फैसले से खुश नहीं हैं.

सोशल मीडिया पर भी हो रही आलोचना

गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी पीएमएल-एन को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. पत्रकार मुहम्मद असद चौधरी ने कहा कि ऐसे समय में जब पीओके में बड़ा आंदोलन चल रहा है, तकनीकी विशेषज्ञों के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा पहुंचे इफ्तिखार गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना हालात को और बिगाड़ सकता है.

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक आमिर महबूब का मानना है कि पार्टी के अंदर नाराजगी के बावजूद पीएमएल-एन की सरकार बनने में फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है. पीओके विधानसभा में पीएमएल-एन के पास 32 सीटें हैं, जबकि प्रधानमंत्री बनने के लिए 27 वोटों की जरूरत है. ऐसे में अगर पार्टी के दो वरिष्ठ नेता भी मतदान से दूर रहते हैं, तब भी पीएमएल-एन के पास बहुमत के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा विधायक रहेंगे.

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